सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ सूर्य सिद्धान्त उ अ इ आ ऊ चित्र २४ यदि प = ३ ३/४ अंश = २२५' तो ज्या प = २२५' ज्या प ज्या ७ १/२ अंश = ज्या २ प = ज्या प + ज्या प - ――― = २२५' + २२५' - १' ज्या प = ४४६'; ज्या प + ज्या २ प ज्या ११ १/४ अंश = ज्या ३ प = ज्या २ प + ज्या प - ――――――― ज्या प = ४४६' + २२५' - ३ = ६७१' ; ज्या प + ज्या २ प + ज्या ३ प ज्या १५° = ज्या ४ प = ज्या ३ प + ज्या प - ――――――――――― ज्या प = ६७१' + २२५' - (१ + २ + ३) = ८६०' ; इसी प्रकार ज्या (स + १) प ज्या प + ज्या २ प + ... ज्या (स प) = ज्या ( स प ) + ज्या प - ――――――――――――――― ज्या प इसकी उपपत्ति महामहोपाध्याय बापूदेव शास्त्रीजी के अनुसार १ यह है :-- कल्पना करो, ज्या प - ज्या ० = त१, ज्या २ प - ज्या प = त२, ज्या ३ प - ज्या २ प = त३,
१. देखो सूर्य सिद्धान्त का बापूदेवजी शास्त्री द्वारा अंग्रेजी अनुवाद