भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१३६ सूर्य-सिद्धान्त रेखा प म पर मा जा लम्ब है यही म मा मन्द केन्द्र की भुज ज्या है । मा से मा का लम्ब को ममा की कोटि ज्या कहते हैं। यह उस रेखा पर लम्ब है जो प म से समकोण बनाती हुई प बिन्दु पर खींची गयी है । गा से प मा पर जो लम्ब गा भा डाला गया है उसे भुजफल और मा भा को कोटिफल कहते हैं । इसी प्रकार जब मध्यम ग्रह मि, मी, मु, मू, इत्यादि कक्षावृत्त के विन्दुओं पर रहता है तब स्पष्ट ग्रह क्रम से गि, गी, गु, गू, इत्यादि मन्द वृत्त के विन्दुओं पर रहता है। ऐसी दशा में स्पष्ट ग्रह कक्षा वृत्त के सि, सी, सु, सू, विन्दुओं पर देख चित्र ३१ पड़ता है । इन विन्दुओं पर भी भुज ज्या, कोटि ज्या, भुजफल, कोटि फल, इत्यादि के लिए वैसा ही समझना चाहिये जैसा पहले कहा गया है । जब मन्द केन्द्र तीन राशि या ६०° के समान होता है तब मध्यम ग्रह मि पर होता है। ऐसी दशा में स्पष्ट ग्रह मध्यम ग्रह से परम अंतर मि सि पर होता है । यही परम मंद फल कहलाता है। जब मन्द केन्द्र ६ राशि या १८०° के समान होता है तब मध्यम ग्रह मु पर और स्पष्ट ग्रह गु पर होता है; इसलिए स्पष्ट ग्रह कक्षावृत्त के सु विन्दु पर देख पड़ता है। इस जगह मन्द फल शून्य तथा मन्द कर्ण पर गु सब