भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 161

१३८ सूर्य सिद्धान्त गामा मन्द परिधि (स्फुट) ─── = ────────────────── माप कक्षावृत्त गाभा स्फुट मन्द परिधि ──── = ──────────────── ˙माजा कक्षावृत्त अथवा भुजफल = स्फुट मन्द परिधि ─────── ──────────────── भुज ज्या कक्षावृत्त या भुजफल = भुज ज्या ✕ स्फुट मन्द परिधि ──────────────────────── (१) कक्षावृत्त यदि स्फुट परिधि अंशों में हो तो कक्षावृत्त का मान ३६० होगा और यदि कलाओं में हो तो कक्षावृत्त का मान २१६०० होगा । इसी तरह भामा : गामा :: पजा : माप ˙ भामा पजा ˙ ─── = ─── ˙ गामा माप अथवा भामा = गामा = स्फुट मन्द परिधि ──── ──── ──────────────── पजा माप कक्षावृत्त वा कोटि फल = स्फुट मन्द परिधि ──────── ──────────────── कोटि ज्या कक्षावृत्त या कोटि फल = कोटि ज्या ✕ स्फुट मन्द परिधि ────────────────────────── (२) कक्षावृत्त इस प्रकार ३६वें श्लोक के नियम की उपपत्ति सिद्ध हो गयी । इस प्रकार जो भुजफल निकलता है वह जिस कोण की ज्या होता है उस कोण को मन्दफल कहते हैं । चित्र ३० में गाभा भुजफल का कोण गापभा है, इसलिए गापभा कोण ही मंद फल है। इस कोण का मान भारतीय रीति से जानने के लिए त्रैराशिक से पहले यह जानना चाहिये कि सामा जीवा का मान क्या है । △ पभागा और △ पमासा सजातीय हैं । इसलिए सामा = गाभा ──── ──── साप गाप अथवा सामा = साप ✕ गाभा ────────── गाप त्रिज्या ✕ भुजफल = ──────────────── (३) मंद कर्ण इस समीकरण से जो कुछ आवे वह सामा मन्द फल की ज्या है, जिससे ज्याओं की सारिणी से मन्द फल जाना जा सकता है । परन्तु श्लोक में गाभा के धनु