भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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( १७ ) सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार निकाले हुए ग्रहों के मध्यम भोगांशों की अशुद्धियाँ | मूल ग्रन्थ के अनुसार अशुद्धियाँ | | | | बीज संस्कृत ग्रन्थ के अनुसार अशुद्धियाँ | | | | | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | | ग्रह | *निरपेक्ष<br>अंश कला विकला | कब शुद्ध<br>ई० | सूर्य की अपेक्षा<br>अंश कला विकला | कब शुद्ध<br>ई० | निरपेक्ष<br>अंश कला विकला | कब शुद्ध<br>ई० | सापेक्ष<br>अंश कला विकला | कब शुद्ध<br>ई० | | सूर्य | — ३ ४६ ४५ | २५० | ० ० ० | ...... | — ३ ४६ ४५ | २५० | ० ० ० | ...... | | बुध | + २ ३४ १० | २३३२ | + ७ २० ५५ | ३२७१ | — ३ २ ४१ | १५१७ | + ० ४४ ५ | १६७० | | शुक्र | + ३ ४१ १६ | १२२२ | + ७ २८ ४ | ६४१ | — १ १६ १८ | २१२६ | + २ ३० २७ | १५०६ | | मंगल | — ४ ५० २७ | ८८६ | — १ ३ ४२ | १४५५ | — ४ ५० २७ | ८८६ | — १ ३ ४२ | १४५५ | | गुरु | + ० ३२ ५ | १५७१ | + ४ १८ ५० | ८३२ | — २ ४६ २१ | ४२०३ | + १ ० २४ | १५७५ | | शनि | — ८ ५२ ५६ | ६६६ | — ५ ६ १४ | ८५७ | — ३ ५५ २१ | १२५० | — ० ८ ३६ | १८२५ | | चन्द्रमा | — ३ ३७ १४ | ११५ | + ० ६ ३१ | १०६७ | — ३ ३७ १४ | ११५ | + ० ६ ३१ | १०६७ | | चन्द्रोच्च | + १ २ ४६ | १६७६ | + ४ ४६ ३४ | १२५२ | — ० ३६ २४ | १६६६ | + ३ १० २१ | १४५६ | | चन्द्रपात | — ० १८ १६ | १६७६ | + ३ २८ २६ | ११६२ | — १ ५७ ३२ | २७१४ | + १ ४६ १३ | १४६८ | *निरपेक्ष स्थान वह है जो राशि-चक्र के स्थिर आदि बिन्दु से नापा जाता है और सापेक्ष वह स्थान है जो सूर्य से नापा जाता है जिसकी स्थिति सौर नाक्षत वर्ष के अनुसार निश्चय की जाती है जो यथार्थ से ३ मिनट के लगभग बड़ा है, इसलिये सूर्य का स्थान भी इसी के अनुसार बदल रहा है ।