सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १५५ विज्ञान भाष्य-अज या मेष पहली राशि का नाम है इसलिए अजादि केन्द्र का अर्थ है पहली राशि से ६ राशि तक का केन्द्र और तुलादि केन्द्र का अर्थ है सातवीं राशि से १२वीं राशि तक का केन्द्र जैसा कि ४०वें श्लोक में कर्कादि और मकरादि के लिए समझाया गया है। जोड़ने और घटाने का कारण ५वें श्लोक के विज्ञान भाष्य में तथा और कई स्थानों में बतलाया गया है (देखो चित्र १५) । अर्कबाहुफलाभ्यस्ता ग्रहभुक्तिर्विभाजिता । भचक्रकलिकाभिस्तु लिप्ताः कार्या ग्रहेऽर्कवत् ॥४६॥ अनुवाद-(४६) सूर्य के भुजफल (मंदफल) को ग्रह की दैनिक स्पष्टगति से गुणा करके गुणनफल को १२ राशि की कलाओं से अर्थात् २१६०० कलाओं से भाग देने पर जो आवे उसको ग्रह के स्पष्ट में जोड़ो (यदि सूर्य का मन्दफल धनात्मक हो) और घटाओ (यदि सूर्य का मन्दफल ऋणात्मक हो) ऐसा करने से स्पष्ट अर्द्धरात्रि काल का ग्रह स्पष्ट होगा । विज्ञान भाष्य-जिस समय मध्यम सूर्य यामोत्तर वृत्त पर आता है उस समय मध्यम मध्यान्ह और जिस समय स्पष्ट सूर्य यामोत्तर वृत्त पर आता है उस समय स्पष्ट मध्यान्ह होता है। इसी प्रकार जिस समय मध्यम सूर्य पाताल में (यामोत्तर वृत्त के उस भाग में जो क्षितिज के नीचे होता है) होता है उस समय मध्यम अर्द्धरात्रि और जिस समय स्पष्ट सूर्य पाताल में होता है उस समय स्पष्ट अर्द्धरात्रि होती है। इससे यह प्रकट है कि स्पष्ट सूर्य मध्यम सूर्य से जितना पहले या पीछे पाताल में आवेगा उतना ही पहले या पीछे स्पष्ट अर्द्धरात्रि होगी । परन्तु स्पष्ट और मध्यम सूर्य के अन्तर को मन्दफल कहते हैं; इसलिए जितने समय में मन्दफल के समान क्रान्तिवृत्त का खंड यामोत्तर उल्लंघन करेगा उतने ही समय आगे या पीछे स्पष्ट अर्द्धरात्रि होगी । इतने समय में ग्रह जितना चलेगा उतना जान कर मध्यम अर्द्धरात्रि कालिक स्पष्ट ग्रह में जोड़ने या घटाने से स्पष्ट अर्द्धरात्रि कालिक स्पष्ट ग्रह होगा । सूक्ष्म गणना करने के लिए पहले यह जानना चाहिये कि मन्दफल के समान क्रान्तिवृत्त का खंड यामोत्तरवृत्त का उल्लंघन कितनी देर में करेगा परन्तु ऐसा न करने से भी अशुद्धि बहुत कम होती है। इसलिए संक्षेप में इतना ही करना बस है कि जितने समय में पूरा भूचक्र यामोत्तर वृत्त का उल्लंघन करता है उतने समय में ग्रह अपनी दैनिक गति के समान आगे बढ़ता है इसलिए जितने समय में मन्द फल के समान क्रान्तिवृत्त यामोत्तर वृत्त का उल्लंघन करता है उतने समय में ग्रह की गति क्या होगी ।