सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५६ सूर्य-सिद्धान्त इस सम्बन्ध में कुछ विशेष चर्चा आगे की जायगी जब 'काल समीकरण' पर लिखा जायगा । मध्ये शीघ्रफलस्यार्धं मान्दमर्धफलं तथा । मध्यग्रहे पुनर्मान्दं सकलं शैघ्यमेव च ॥४७॥ ग्रहभुक्तेः फलं कार्यं ग्रहवन्मन्दकर्मणि । कर्क्यादौ तद्धनं तत्र मकरादावृणं स्मृतम् ॥४८॥ दोर्ज्यान्तरगुणा भुक्तिस्तत्त्वनेत्रोद्धृता पुनः । स्वमन्दपरिधिक्षुण्णा भगणांशोद्धृता कलाः ॥४६॥ अनुवाद—(४७) चन्द्रमा की मध्यम दैनिक गति से इसके मंदोच्च की दैनिक गति घटा कर आगे (४८ ४६ श्लोकों में) बतलायी जाने वाली क्रिया से चन्द्रमा का मंदगति फल निकाल कर दैनिक मध्यम गति में घटाने या जोड़ने से चन्द्रमा की स्पष्ट दैनिक गति निकलती है । (४८) अन्य ग्रहों की मध्यम दैनिक गति से ही मंदगति फल ग्रह के मंदफल जानने की क्रिया की तरह जानना चाहिए जिसकी रीति यह है—मध्यम दैनिक गति को गत और गम्य भुजज्याओं के अन्तर से गुणा करके गुणनफल को २२५ से भाग दे दो; (४६) लब्धि को मन्द परिधि से गुणा करके भगणांश से (यदि मन्द परिधि अंशों में हो तो ३६० से और यदि कलाओं में हो तो २१६०० से) भाग दे दो, लब्धि कलाओं में होगी। यदि मन्द केन्द्र दूसरे और तीसरे पदों में (कर्क्यादि पदों में) हो तो जोड़ो और पहले या चौथे पदों में (मकरादि पदों में) हो तो घटाओ । ऐसा करने से सूर्य और चंद्रमा की स्पष्ट दैनिक गति तथा अन्य ग्रहों की मन्द दैनिक गति ज्ञात होती है । विज्ञान भाष्य—किसी ग्रह की मध्यम दैनिक गति में से उसके मन्दोच्च की दैनिक गति घटा देने से उसके मन्द केन्द्र की दैनिक गति ज्ञात होती है । इसे ही ग्रह की केन्द्र गति कहते हैं । परन्तु चन्द्रमा के सिवा अन्य ग्रहों के मन्दोच्च की गति इतनी कम होती है कि उसके छोड़ देने से कोई अशुद्धि नहीं हो सकती इसलिए अन्य ग्रहों की मध्यम दैनिक गति ही केन्द्र गति समझ ली गयी है, केवल चन्द्रमा के लिए केन्द्र गति जानने का विधान है । जैसे मध्यम ग्रह में मन्द फल का संस्कार देने से मन्द स्पष्ट ग्रह निकलता है वैसे ही मध्यम दैनिक गति में गति के मन्द फल अथवा मन्द गति फल का संस्कार देने से मन्द स्पष्ट गति ज्ञात होती है । सूर्य चन्द्रमा के लिए यही स्पष्ट दैनिक गति हो जाती है । अन्य ग्रहों के लिए अगले ५०—५२ श्लोकों में बतलायी जाने वाली क्रिया भी करनी चाहिए । इस नियम की उत्पत्ति यों है :— एक दिन में स्पष्ट ग्रह जितना चलता है वही ग्रह की स्पष्ट दैनिक गति है । इसलिए स्पष्ट दैनिक गति जानने के लिए केवल यह जान लेना पर्याप्त है कि किसी