भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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स्पष्टाधिकार १७६ कला या विकला में होगा और सूर्य के मध्य से यही गृह का मंदफल होगा। यदि ज्याओं को आजकल की रीति से भिन्न में प्रकट किया जाय तो सरल करने पर म के अतिरिक्त जो संख्या दशमलव भिन्न में आवेगी वह रेडियन में होगी जिसकी कला या विकला बनाने के लिए ३४३७.७५ या २०६२६५ से गुणा करना होगा। दोनों रीतियों से फल एक ही होगा। गृह के लिए जिस तरह समीकरण (ज) प्राप्त किया गया है उसी तरह प्रत्येक ग्रह के लिए उसकी केन्द्र च्युति को समीकरण (छ) में उत्थापन करने से एक सरल सूत्र प्राप्त हो सकता है। प्रत्येक ग्रह की केन्द्र च्युति तथा अन्य आवश्यक बातें आगे एक सारणी में दे दी जायेंगी। सूर्य के मध्य से ग्रह की दूरी किस समय क्या होती है यह जानने के लिए एक समीकरण है जो समीकरण (२) अर्थात् कर्ण = त (१ - च कोज्या उ) से लैग्रेंज सिद्धान्त के अनुसार १ - च कोज्या उ का मान जान लेने से आ जाता है। लैग्रेंज सिद्धान्त के अनुसार, १ - च कोज्या उ = (१ - च कोज्या म) + च ज्या म ता/ताम (१ - च कोज्या म) + च²/|२ · ता/ताम { ज्या² म × च ज्या म }

  • च³/|३ · ता²/ताम² { ज्या³ म × च ज्या म } = १ - च कोज्या म + च²/२ - च²/२ कोज्या २ म
  • ३/८ च³ कोज्या म - ३/८ च³ कोज्या ३ म - च⁴/३ × कोज्या ४ म
  • च⁴/३ कोज्या २ म + ............ = (१ + च²/२) - च (१ - ३/८ च²) कोज्या म - च²/२ (१ - २/३ च²) कोज्या २ म
  • ३/८ च³ कोज्या ३ म + .........