सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथम अध्याय मध्यमाधिकार (संक्षिप्त वर्णन) [ १ श्लोक — ईश्वर वंदना । २-७ श्लोक — ज्योतिःशास्त्र जानने के लिए मयासुर का सूर्य भगवान की तपस्या करना, सूर्य भगवान का प्रसन्न होकर वर देना तथा अपने शरीर से एक पुरुष का उत्पन्न करना । ८-९ श्लोक — सूर्यांश पुरुष का मायासुर से कहना कि जो शास्त्र पहले सूर्य भगवान ने महर्षियों से कहा था वही कुछ परिवर्तन के साथ कहा जा रहा है । १० श्लोक — काल के दो भेद (१) अनादि और अनन्त, (२) कलनात्मक । ११-२० श्लोक -- निमेष से लेकर कल्प तक की काल की इकाइयाँ । २१-२३ श्लोक — ब्रह्मा की वर्तमान आयु । २४ श्लोक — कल्प के आरंभ से कितने समय में सृष्टि रची गयी । २५-२७ श्लोक — नक्षत्रों और ग्रहों की गति का कारण । २८ श्लोक — कोण नापने की इकाइयाँ । २९-३४ श्लोक — एक महायुग में ग्रहों, उनके शीघ्रोच्चों, चन्द्रमा के उच्च और पात तथा नक्षत्रों के कितने चक्कर होते हैं । ३५- ३६ श्लोक — चान्द्र और सौर मासों का सम्बन्ध । ३७-३९ श्लोक — एक महायुग में कितने सावन दिन, अधिमास तथा तिथियाँ होती हैं । ४० श्लोक — एक कल्प में कितने सावन दिन तथा तिथियां होती हैं । ४१-४४ श्लोक — एक कल्प में ग्रहों के मन्दोच्चों तथा पातों के कितने चक्कर होते हैं । ४५-४७ श्लोक — कल्प के आरंभ से सत्ययुग के अंत तक का समय । ४८-५० श्लोक — सृष्टि के आरंभ से अब तक कितने दिन बीते, यह जानने की रीति । ५१-५२ श्लोक — दिनपति, वर्षपति और मासपति जानने की रीति । ५३-५४ श्लोक — ग्रहों के मध्यम स्थान जानने की रीति । ५५ श्लोक — वृहस्पति का वर्ष (संवत्सर) जानने की रीति । ५६-५८ श्लोक - सत्ययुग के अंत में ग्रहों के स्थान क्या थे । ५९ श्लोक — व्यास और परिधि का सम्बन्ध तथा भूपरिधि का परिमाण । ६०-६१ श्लोक — किसी स्थान के अक्षांश-वृत्त का परिमाण जानना तथा उससे ग्रह का मध्यम स्थान निकालना । ६२ श्लोक - भारतवर्ष की मध्यरेखा पर कौन-कौन प्रसिद्ध नगर हैं । ६३- ६५ श्लोक — चंद्र-ग्रहण से यह जानना कि अमुक स्थान मध्य रेखा से कितना पूर्व या पश्चिम है । ६६ श्लोक - सौर-प्रवृत्ति कब होती है । ६७ श्लोक — किसी इष्टकाल में ग्रहों का स्थान क्या है । ६८-७० श्लोक — चन्द्रमा इत्यादि ग्रह कान्ति-वृत्ति से कितने उत्तर या दक्षिण जा सकते हैं । ]