भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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तृतीय अध्याय त्रिप्रश्नाधिकार ( संक्षिप्त वर्णन ) [ १-४ श्लोक-समतल भूमि में खड़ा शंकु गाड़कर दिशा सूचित करने वाली रेखाएँ खींचना । ५ श्लोक-शंकु की छाया और उसकी नोक से पूर्व-पश्चिम रेखा का अंतर जान कर छाया की दिशा जानना । ६ श्लोक - सममंडल, उन्मंडल और विषुवन्मण्डल की परिभाषा । ७ श्लोक - अग्रा की परिभाषा । ८ श्लोक - शंकु और उसकी छाया का परिमाण जानकर छायाकर्ण जानना । ६-१० श्लोक - अयनांश जानकर ग्रहों की क्रांति, छाया, चर इत्यादि जानना । ११ श्लोक - अयनान्त या विषुवत् दिन को सूर्य का बेध करके अयनांश जांचना । १२ श्लोक - पलभा की परिभाषा । १३ श्लोक - पलभा से लम्बांश और अक्षांश जानना । १४-१५ श्लोक - मध्याह्नकालिक सूर्य का नतांश और क्रान्ति जानकर अक्षांश जानना । १६ श्लोक - अक्षांश से पलभा जानना । १७-१८ श्लोक अक्षांश और मध्याह्नकालिक सूर्य के नतांश से सूर्य की क्रान्ति जानना और सूर्य की क्रान्ति से सूर्य का स्पष्ट सायन भोग जानना और मंदफल का संस्कार देकर मध्य सायन भोग जानना । २०-२१ - अक्षांश और सूर्य की क्रांति से नतांश जानकर मध्याह्नकालिक छाया और छायाकर्ण जानना । २२ श्लोक - सूर्य की उदयकालिक अग्रा जानकर इष्टकाल की अग्रा जानना । २३-२४ श्लोक - अग्रा और पलभा से छाया का भुज जानना । २५ श्लोक - जब सूर्य सममंडल में हो तब छायाकर्ण जानने की रीति । २६ श्लोक - जब सूर्य की उत्तर क्रान्ति अक्षांश से कम हो तब सममंडल सूर्य का छायाकर्ण जानना । २७ श्लोक - अग्रा जानने की दूसरी रीति । २८-३१ श्लोक - करणी और फल के ज्ञान से सूर्य का उन्नतांश जानना जब सूर्य अग्निकोण या नैऋत्य कोण में हो । ३२ श्लोक - उन्नतांश जानकर नतांश जानना । ३३ श्लोक - उन्नतांश और नतांश । छाया और छायाकर्ण जानना ३४- ३५ श्लोक - चरज्या और नतकाल से छेद जानकर दृग्ज्या अर्थात् नतांश ज्या जानना और उससे पहले की तरह छाया और छायाकर्ण जानना । ३६-३८ श्लोक - छाया और छायाकर्ण से नतकाल जानना । ३६ और ४० का पूर्वार्द्ध - अग्रा से क्रान्ति जानकर सूर्य का भोगांश जानने की दूसरी रीति । ४० का उत्तरार्द्ध और ४१ का पूर्वार्द्ध - भाभ्रम रेखा खींचना । ४१ का उत्तरार्द्ध और ४२ श्लोक - लंका में सायन राशियों के उदय- काल जानने की रीति । ४३-४४ श्लोक - लंका में सायन मेष, वृष और मिथुन राशियों के उदयासु और अन्य स्थानों में सायन राशियों के उदयासु जानने की रीति । ४५-४७ श्लोक - किस समय कौन राशि पूर्व क्षितिज में लग्न होती है यह जानना । ४८ श्लोक -- मध्यालग्न जानना । ४६-५० श्लोक - लग्न जानकर समय जानना । ]