सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार २२७ चित्र ४६ अनुवाद-(६) सममण्डल, उन्मण्डल और विषुवन्मण्डल पूर्व और पश्चिम विन्दुओं पर होते हैं । विज्ञान भाष्य - इस श्लोक का शब्दार्थ यह है-पूर्व पश्चिम विन्दुओं से जानेवाली रेखा को सम-मण्डल कहते हैं और उसी को उन्मण्डल और विषुवन्मण्डल भी कहते हैं । परन्तु यथार्थ में यह तीनों शब्द भिन्न-भिन्न अर्थ रखते हैं इसलिये अनुवाद में मैंने अन्य कई टीकाकारों के विरुद्ध वही अर्थ लिखा है जो उचित है । जान पड़ता है कि इस श्लोक का शुद्ध रूप यह नहीं है वरन् भ्रम के कारण ऐसा कर दिया गया है। रंगनाथजी ने अपनी गूढ़ार्थ प्रकाशिका टीका में इसी को शुद्ध मान कर इन तीनों शब्दों की एकरूपता सिद्ध करने की चेष्टा की है परन्तु वह युक्तियुक्त नहीं जान पड़ती क्योंकि यह तीनों शब्द बहुत प्राचीन काल से भिन्न- भिन्न अर्थ रखते आये हैं और इनमें समानता केवल इतनी है कि यह तीनों मण्डल पूर्व पश्चिम विन्दुओं से होकर जाते हैं । सममण्डल (prime vertical) उस ऊर्ध्वाधर (vertical) वृत्त को कहते हैं जो खस्वस्तिक और पूर्व पश्चिम विन्दुओं से होकर जाता है ।