सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३६ सूर्य-सिद्धान्त आजकल बहुत सूक्ष्मयंत्रों के द्वारा वसंत संपात की वार्षिक गति का सूत्र निउकंब १ (Newcomb) के अनुसार यह है। ५०''.२४५३ + ०''.०००२२२५ व जहाँ व, १८५० ई० अथवा १९०७ वि० के बाद के बीते हुए वर्षों की संख्या है। इस हिसाब से १६८२ वि० के आरंभ में वसंत सम्पात की वार्षिक गति ५०''.२४५३ + ०''.०००२२२५ × ७५ = ५०''.२६२ भारतीय, यूनानी, अरबी तथा यूरोपीय विद्वानों के अयन चलन संबंधी विचारों की चर्चा संक्षेप में इसलिए की गयी जिससे प्रकट हो जाय कि इस संबंध में हमारे ज्योतिषियों के विचार कितने स्वतंत्र हैं। अब यह प्रश्न होता है कि हमारे ज्योतिषियों ने अयन की वार्षिक गति १ कला क्यों मानी है जब कि शुद्ध गति ५०.२६२ विकला के लगभग है। इसका कारण यह है कि हमारे ज्योतिषी अयनांश इस अंतर को कहते हैं जो विषुव सम्पात से मेष के आदि विन्दु का होता है। और मेष का आदि विन्दु वह वेध से नहीं निश्चय करते वरन् गणना से करते हैं। गणना के लिए हमारे यहाँ सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार ३६५ दिन १५ घड़ी ३१ पल ३१.४ विपल का वर्ष माना जाता है जब कि आधुनिक खोज के अनुसार शुद्ध वर्ष का मान ३६५ दिन १५ घड़ी २२ पल ५६.८७ विपल होता है (देखो मध्यमाधिकार पृष्ठ २० की सारिणी)। इस तरह हमारे वर्ष का मान शुद्ध वर्ष से ८ पल ३४.५३ विपल अधिक है। इतने समय में सूर्य ५८' ४२''.४६ * प्रति दिन के हिसाब से ८.३६१ विकला चलता है। इसलिए शुद्ध वर्ष के अनुसार यदि वसंत सम्पात की गति ५०''.२६२ होती है तो हमारे वर्ष के अनुसार स्पष्ट मेष संक्रान्ति के विन्दु से वसंत सम्पात ५०.''२६२ + ८''.३६१ = ५८''.६५३ विकला पच्छिम हो जाता है। अर्थात् यदि सौर वर्ष का मान वह रखा जाय जो सूर्य-सिद्धान्त का है तो प्रतिवर्ष ५८''.६५३ वसंत संपात की गति मानने से शुद्धता होती है। इससे सिद्ध होता है कि मुंजाल, भास्कराचार्य, गणेश इत्यादि ने अयन की गति जो १ कला या ६० विकला मानी है वह इस समय सत्य से केवल १.३४७ विकला अधिक है। जिस समय मुंजाल ने प्रत्यक्ष वेध से अयन गति ५६.६००७ विकला निश्चय किया था उस समय अशुद्धि तनिक सी और रही होगी क्योंकि ६८६ विक्रमीय में शुद्ध अयन गति १. Ball's Spherical Astronomy pp. 187. *यह मेष संक्रान्ति के दिन सूर्य की स्पष्ट दैनिक गति है और सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार निकाली गयी है।