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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 26

मध्यमाधिकार ३ पिछले दो सौ वर्ष के भीतर लगा है और यह कोरी आँख से नहीं दिखाई पड़ते। चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, इसलिए यह उपग्रह है। अन्य ग्रहों के भी उपग्रह दूरवीक्षण यंत्र से देखे गये हैं। परन्तु हमारे ज्योतिष ग्रन्थों में पृथ्वी को नहीं वरन् सूर्य को ग्रह माना है। चन्द्रमा भी ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। युरेनस और नेपचून की कहीं चर्चा नहीं है। इसलिए हमारे यहाँ सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु अथवा वृहस्पति, शुक्र और शनि सात स्थूल ग्रह तथा राहु और केतु दो सूक्ष्म ग्रह माने जाते हैं। दो सूक्ष्म ग्रहों का पूरा विवरण इसी अध्याय में चन्द्रमा के पातों का वर्णन करते समय लिखा जायगा। ज्योतिःशास्त्र में इन ग्रहों की गतियों से जो घटनाएँ आकाश में होती हैं उनका वर्णन है, इसलिए इस श्लोक में ज्योतिःशास्त्र का दूसरा नाम 'ग्रहों का चरित' बतलाया गया है। विदितस्ते मया भावः तपसाऽऽराधितस्त्वहम्¹ । दद्यां कालाश्रयं ज्ञानं ज्योतिषां² चरितं महत् ॥ ५ ॥ न मे तेजस्सहः कश्चिद्दाह्यातुं नास्ति मे क्षणः । मदंशः पुरुषोऽयं ते निश्शेषं कथयिष्यति ॥ ६ ॥ अनुवाद—भगवान् सूर्य ने कहा कि तेरा भाव मुझे विदित हो गया है और तेरे तप से मै बहुत संतुष्ट हूँ, मैं तुझे ग्रहों के महान् चरित का उपदेश करता हूँ, जिससे समय का ठीक-ठीक ज्ञान हो सकता है; परंतु मेरा तेज कोई सह नहीं सकता और उपदेश देने के लिए मुझे समय भी नहीं है इसलिए यह पुरुष, जो मेरा अंश है, तुझे भली भांति उपदेश देगा ॥ ५-६ ॥ इत्युक्त्वाऽन्तर्दधे देवस्तमादिश्यांशमात्मनः । स पुमान्मयमाहेदं प्रणतं प्राञ्जलि स्थितम् ।।७।।* शृणुष्वैकमनाः पूर्वं यदुक्तं ज्ञानमुत्तमम् । युगे युगे महर्षीणां स्वयमेव विवस्वता ।।८।।

  • इस श्लोक के पहले पूना के आनन्दाश्रम के सूर्य सिद्धान्त की एक टीका रहित प्रति में यह श्लोक भी पाया जाता है :— तस्मात्त्वं स्वां पुरीं गच्छ तत्र ज्ञानम् ददामि ते । रोमके नगरे ब्रह्मशापानम्लेच्छावतार धृक् ।। परन्तु यह सूर्य सिद्धान्त की अन्य किसी प्रति में नहीं है। आगे पीछे के श्लोकों से इसका कोई सम्बन्ध भी नहीं देख पड़ता, इसलिए यह क्षेपक है ।