भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार २५१ है। जिस समय मेष संक्रान्ति होती है उसी समय का सूर्य का सायन भोग जान लिया जाय तो यही अयनांश होता है। परन्तु दूरदर्शक यंत्रों के अभाव में यही बात नाविक पंचांग (Nautical almanac) से भी जानी जा सकती है। इसलिए इसी से १९७९ विक्रमीय अथवा १९२२ ई० की मेष संक्रान्ति काल का सूर्य का सायन भोग निकाला जाता है। १९७९ विक्रमीय की मेष संक्रान्ति सूर्य सिद्धान्त के अनुसार १३ अप्रैल गुरुवार को उज्जैन के मध्यम ६ बजे प्रातःकाल के उपरांत १८ घड़ी ४७ पल १२ विपल पर हुई। काशी उज्जैन से ७२ पल ५० विपल† पूर्व है। इसलिए काशी में मेष संक्रान्ति मध्यम ६ बजे के उपरांत २० घड़ी ० पल और २ विपल पर होगी। परन्तु काशी ग्रीनविच से ८३°३′४″ अथवा १३ घड़ी ५० पल ३१ विपल पूर्व है। इसलिए जिस समय काशी में मेष संक्रान्ति हुई उस समय ग्रीनविच में मध्यम ६ बजे के उपरांत ६ घड़ी ६ पल ३१ विपल रहा होगा। इस वर्ष १२ अप्रैल के मध्यम मध्याह्न काल में सूर्य का भोगांश* २१°४७′३१″.५ और १३ ,, ,, ,, ,, २२°४६′१७″.७ अंतर ५८′४६″.२ इसलिए ६० घड़ी में सूर्य की स्पष्ट गति ५८′४६″.२ हुई। १३ अप्रैल को ग्रीनविच का मध्याह्न काल मध्यम ६ बजे से ६ घंटे अथवा १५ घड़ी उपरांत हुआ और मेष संक्रान्ति मध्यम ६ बजे से ६ घड़ी ६ पल ३१ विपल पर ही हो गयी इसलिए संक्रान्ति काल से १५ घड़ी—६ घड़ी ६ पल ३१ विपल= ८ घड़ी ५० पल २६ विपल पश्चात् १३ अप्रैल का मध्याह्न हुआ जिस समय सूर्य का भोगांश २२°४६′१७″.७ था। इससे प्रकट है कि संक्रान्ति काल में सूर्य का भोगांश इससे कम होगा। परन्तु सूर्य की स्पष्ट गति ५८′४६″.२ है इसलिए ८ घड़ी ५० पल २६ विपल में सूर्य ५८′४६″.२ x ८ घड़ी ५० पल २६ विपल ─────────────────────────── ६० घड़ी अथवा ८′३६″.६०६ चला होगा।


† काशी का देशान्तर (ग्रीनविच से) ८३°३′४″ पूर्व और उज्जैन का ७५°४६′६″ पूर्व है। इन दोनों का अंतर ७°१६′५८″ हुआ जो ७२ पल ५० विपल के समान होता है। इसलिए यही उज्जैन से काशी का देशान्तर हुआ।

  • Nautical almanac for 1922 pp. 40.