भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२६० सूर्य-सिद्धान्त

अनुवाद—(१४) किसी दिन के मध्याह्न की छाया को जिसे भुज भी कहते हैं त्रिज्या से गुणा करके मध्याह्न के छाया कर्ण से भाग दे दो और भागफल का धनु बनाओ तो सूर्य का मध्याह्नकालिक नतांश ज्ञात हो जायगा । यदि छाया दक्षिण की ओर हो तो (१५) उत्तर नतांश होगा और यदि छाया उत्तर हो तो दक्षिण नतांश होगा । यदि नतांश और सूर्य की क्रान्ति की दिशाएं भिन्न हों तो इन दोनों का योग- फल और एक ही हों तो अन्तर अक्षांश होगा । विज्ञान भाष्य—खस्वस्तिक से आकाश के किसी विन्दु (तारा, सूर्य का केन्द्र इत्यादि) पर जाता हुआ जो वृत्त क्षितिज से समकोण पर खींचा जाता है उसे ऊर्ध्ववृत्त (Vertical Circle) कहते हैं । इस वृत्त पर उस विन्दु का खस्वस्तिक से जो अंतर होता है उसे उस विन्दु का नतांश (zenith distance) कहते हैं और क्षितिज से जो अन्तर होता है उसे उस विन्दु का उन्नतांश (altitude) कहते हैं । सममण्डल भी एक ऊर्ध्ववृत्त है । पर इसमें विशेषता यह है कि यह क्षितिज के पूर्व पश्चिम विन्दुओं पर होता है । यामोत्तर वृत्त भी उत्तर दक्षिण बिन्दुओं पर ऊर्ध्ववृत्त है । इसलिए मध्याह्न काल में जब कि सूर्य यामोत्तर वृत्त पर रहता है, इससे खस्वस्तिक का जो अंतर होता है वह इसका मध्याह्नकालिक नतांश हुआ । यदि सूर्य विषुवद्वृत्त पर भी हो तो यही अक्षांश के समान होगा । यदि सूर्य विषुवद्वृत्त पर न हो तो यह या तो विषुवद्वृत्त से उत्तर रहेगा या दक्षिण । मध्याह्न काल में सूर्य का विषुवद्वृत्त से जो अंतर होता है वही सूर्य की क्रान्ति है जो सूर्य के विषुवद्वृत्त से उत्तर या दक्षिण रहने के अनुसार उत्तर या दक्षिण क्रान्ति कहलाती है । इसी प्रकार सूर्य खस्वस्तिक से भी उत्तर या दक्षिण हो सकता है। यदि सूर्य खस्वस्तिक से उत्तर हो तो छाया दखिन की ओर होगी और खस्वस्तिक से सूर्य का अंतर उत्तर नतांश कहलायेगा । परन्तु यदि सूर्य खस्व- स्तिक से दखिन हो तो छाया उत्तर की ओर होगी और सूर्य का नतांश दक्षिण होगा । चित्र ५६ से यह स्पष्ट है कि सूर्य के मध्याह्नकालिक नतांश और क्रान्ति से अक्षांश कैसे जाना जा सकता है :— उ ध ख व द यामोत्तर वृत्त, ध उत्तरी आकाशीय ध्रुव, ख खस्वस्तिक, व विषुवद्वृत्त ओर यामोत्तर वृत्त का सामान्य विन्दु, और र, रा, री सूर्य के तीन भिन्न-भिन्न स्थान हैं । र पर सूर्य विषुवद्वृत्त के दखिन है इसलिए इस समय सूर्य की दक्षिण क्रान्ति व र है परन्तु व रा या व री सूर्य की उत्तर क्रान्तियां हैं। इसी प्रकार ख र और ख रा सूर्य के दक्षिण नतांश और ख री उत्तर नतांश हैं। ख व स स्थान का अक्षांश है । चित्र से प्रकट है कि