भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार २६१ चित्र ५६ व ख = ख र - व र (१) = ख रा + व रा (२) = व री - ख री (३) समीकरण (१) में सूर्य के नतांश और क्रान्ति दोनों दक्षिण तथा समीकरण (३) में नतांश और क्रान्ति दोनों उत्तर हैं । परन्तु समीकरण (२) में नतांश दक्षिण और क्रान्ति उत्तर हैं । इससे प्रकट है कि जब नतांश और क्रान्ति दोनों की दिशाएँ एक ही हों तो इनका अंतर और भिन्न हों तो योग करने से अक्षांश जाना जा सकता है । यदि न नतांश, क क्रान्ति और अ अक्षांश माने जायं तो इनका सम्बन्ध इस समीकरण से प्रकट होगा— न ± क = अ यहां धन का चिह्न उस समय लिखा जायगा जब न और क दोनों की दिशाएँ भिन्न हैं और ऋण का चिह्न उस समय जब दोनों की दिशाएँ एक ही हों । ऊपर के दोनों श्लोकों में यह बतलाया गया है कि शंकु की मध्याह्नकालीन छाया नापकर नतांश कैसे जानते हैं । यह तो स्पष्ट ही है कि शंकु और छायाकर्ण के बीच में जो कोण होता है वह सूर्य का नतांश है । इसलिए