सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१८ सूर्य-सिद्धान्त निरयन मेष के आदि विन्दु की क्रान्तिज्या = ज्या २२°४१' X ज्या २३° २७' [पृष्ठ ३०५] = .३८५६ X .३९७६ = .१५३४ ∵ निरयन मेष के आदि विन्दु की क्रान्ति = ८° ४६' निरयन वृष के आदि विन्दु की क्रान्ति ज्या = ज्या ५२° ४१' X ज्या २३° २७' = .३१६५ ∵ निरयन वृष के आदि विन्दु की क्रान्ति = १८° २७' यही निरयन मेष के अन्तिम विन्दु की क्रान्ति भी है। निरयन मेष के आदि विन्दु के विषुवांश की ज्या ज्या २२°४१' X कोज्या २३°२७' = ——————————————————————— कोज्या ८°४६' ·३८५६ X ·९१७५ = ———————————————— ·९८८२ = ·३५८० ∵ विषुवांश = २०°५८' = १२५८' ∵ लंका में अयन भाग के उदयासु = १२५६ प्रयाग में निरयन मेष के आदि विन्दु की चरज्या = स्परे ८°४६' X स्परे २५°२५' = ·१५५१ X ·४७५२ = ·०७३७ ∵ चरांश = ४°१४ ∵ निरयन मेष के आदि विन्दु के चरासु = २५४ ∵ प्रयाग में अयन भाग के उदयासु = १२५६ - २५४ = १००२ इसी प्रकार निरयन मेष के अन्तिम विन्दु अथवा निरयन वृष के आदि विन्दु के विषुवांश की ज्या ज्या ५२°४१' X कोज्या २३°२७' = ——————————————————————— कोज्या १८°२७' ·७९५३ X ·९१७५ = ———————————————— ·९४८६ = ·७६६२