सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२२ सूर्य-सिद्धान्त ६वें स्तम्भ में यह दिखलाया गया है कि मेष के आदि से पूरी राशि के उदय होने में क्या समय लगता है। जैसे यदि जानना है कि मेष के आदि से पूरे सिंह के उदय होने तक क्या समय लगता है तो सिंह के सामने ६वें स्तम्भ में २५ घड़ी ५२ पल इसका उत्तर है अर्थात् मेष, वृष, मिथुन, कर्क और सिंह राशियाँ प्रयाग में २५ घड़ी ५२ पल में उदय होती हैं । इस स्तम्भ से लग्न जानने में बड़ी सहायता मिलेगी । इसलिए यह भी यहाँ दे दिया गया है । यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि यह समय नाक्षत्र मान के अनुसार है जो सावन मान से कुछ भिन्न होता है । (देखो पृष्ठ ७, ८) । इस सारिणी से यह बात सिद्ध होती है कि किसी स्थान में राशियों के उदयासु जानने के लिये केवल चरांश जान लेने से आवश्यक संशोधन सुगमतापूर्वक हो सकते हैं । परन्तु यह सारिणी सदैव काम नहीं दे सकती क्योंकि अयन चलन के कारण प्रत्येक निरयण राशि के आदि विन्दु के भोगांश और विषुवांश बढ़ते रहते हैं । इससे क्रान्ति, चरांश और चरखंडों में कुछ अन्तर होता जाता है । परन्तु यह अन्तर बहुत सूक्ष्म होता है क्योंकि अयन चलन के कारण भोगांश में प्रतिवर्ष केवल १ कला के लगभग वृद्धि होती रहती है इसलिए कम से कम २५ वर्ष से बाद सारणी में एक बार संशोधन कर देना आवश्यक है । यह जानना कि किस समय क्रान्तिवृत्त का कौन विन्दु पूर्व क्षितिज में लग्न है गतगम्यासवः कार्या भास्करादिष्टकालिकात् । स्वोदयासुकृता भुक्तभोग्या भक्ता खवह्निभिः ॥४५॥ अभीष्टघटिकासुभ्यो भोग्यासून् प्रविशोधयेत् । तद्वैध्यभलग्नासून् एवं यातांस्तथोत्क्रमात् ॥४६॥ शेषं त्रिंशत्क्रमाभ्यस्तमभुक्तोदयभाजितम् । भागादिहीनं युक्तं च तल्लग्नं क्षितिजे तथा । ४७॥ अनुवाद-(४५) जिस समय का लग्न जानना हो उस समय के स्पष्ट सूर्य से गतासु और भोग्यासु जानना चाहिये । सूर्य राशि के जितने अंश पर होता है उसको गतांश और राशि का जितना अंश सूर्य के भोगने को शेष रह जाता है उसको भोग्यांश कहते हैं । राशि के उदयासुओं को गतांश से गुणा करके ३० से भाग देने पर गतासु और भोग्यांश से गुणा करके ३० से भाग देने पर भोग्यासु जाने जाते हैं। (४६) सूर्योदय से जितनी घड़ी (समय) इष्ट काल तक बीत चुकी हो उसमें से भोग्यासुओं को घटा देना चाहिये । जो शेष हो उसमें से आगे आनेवाली राशि के उदयासुओं को घटाना