भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१२ सूर्य सिद्धान्त इत्थं युगसहस्रेण भूतसंहारकारकः । कल्पो ब्राह्ममहः प्रोक्तं शर्वरी तस्य तावती ॥२०॥ अनुवाद—इस प्रकार एक हज़ार महायुग का एक कल्प होता है जो ब्रह्मा के एक दिन के समान है । इतने ही समय की ब्रह्मा की एक रात होती है, जिसमें सृष्टि का लय हो जाता है ॥ २० ॥ विज्ञान भाष्य—ब्रह्मा के दिन और रात का बहुत ही अच्छा चित्र भगवान कृष्ण ने श्री मद्भगवद्गीता में आठवें अध्याय में यों किया है :— "सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद् ब्रह्मणो विदुः । रात्रिं युगसहस्रां तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥ १७ ॥ अव्यक्ताद् व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे । रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्त संज्ञके ॥ १८ ॥ भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते । रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥ १९ ॥ अर्थात् "(१७) अहोरात्र को (तत्त्वतः) जाननेवाले पुरुष समझते हैं कि (कृत, त्रेता, द्वापर और कलि इन चार युगों का महायुग होता है और ऐसे) हज़ार महा- युगों का समय ब्रह्मदेव का एक दिन होता है और ऐसे ही हज़ार युगों की (उसकी) एक रात्रि होती है । (१८) 'ब्रह्मदेव के दिन का आरंभ होने पर अव्यक्त से सब व्यक्त (पदार्थ) निर्मित होते हैं और रात्रि होने पर उसी पूर्वोक्त अव्यक्त में लीन हो जाते हैं । (१९) हे पार्थ ! भूतों का यही समुदाय (इस प्रकार) बार-बार उत्पन्न होकर अवश होता हुआ, अर्थात् इच्छा हो या न हो रात होते ही लीन हो जाता है और दिन होने पर (फिर) जन्म लेता है ।'*" परमायुश्शतं तस्य तयाऽहोरात्रसङ्ख्यया । आयुषोऽर्धमितं तस्य शेषात्कल्पोऽयमादिमः ॥ २१ ॥ कल्पादस्माच्च मनवः षड् व्यतीतास्ससंशयः । वैवस्वतस्य च मनोः युगानां त्रिघनो गतः ॥ २२ ॥ अष्टाविंशाद्युगादस्माद्यातमेकं कृतं युगम् । अतः कालं प्रसंख्याय सङ्ख्यामेकत्र पिण्डयेत् ॥ २३ ॥ अनुवाद—(२१) ब्रह्मा की आयु उन्हीं के दिन-मान से सौ वर्ष की होती है । इस समय ब्रह्मा की आधी आयु बीत चुकी है, शेष आधी आयु का यह पहला कल्प *गीता रहस्य पृष्ठ ७३४, ७३५

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