भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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३३८ सूर्य-सिद्धान्त

इससे प्रकट है कि स्पष्ट सावन दिन का मान समान नहीं होता । १ली जनवरी के मध्यान्ह से दूसरी जनवरी के मध्यान्ह तक के सावन दिन का मान दूसरी और तीसरी अप्रैल के सावन दिन के मान से ४६ ४ सेकंड बड़ा होता है, इत्यादि । ऐसी घड़ी बनाना असम्भव है जो सूर्य की गति के अनुसार अपनी चाल घटाया-बढ़ाया करे क्योकि यांत्रिक बल से चलनेवाली घड़ी सदा समान चाल से चलेगी । इसलिए ऐसी घड़ियों से जो समय जाना जाता है वह धूपघड़ी के समय से भिन्न रहता है क्योंकि धूपघड़ी से स्पष्ट सावन दिन का मान जाना जाता है जो प्रतिदिन बदलता रहता है। यदि नाक्षत्र काल बतलाने वाली घड़ी से काम लिया जाय तो लौकिक व्यवहार में सुविधा नही होती क्योकि नाक्षत्र काल के २४ घंटे सावन दिन के २४ घंटे से ४ मिनट के लगभग छोटे होते हैं । इसलिए यदि आज सूर्य का यामोत्तरोल्लंघन नाक्षत्र घड़ी में ठीक १२ बजे होता है तो कल सूर्य का यामोत्तरोल्लंघन नाक्षत्र घड़ी के १२ बजकर ४ मिनट पर होगा । इस तरह प्रतिदिन चार-चार मिनट पीछे होते- होते १५ दिन में सूर्य का यामोत्तरोल्लंघन नाक्षत्र घड़ी के १ बजे होगा, १ महीने में सूर्य का यामोत्तरोल्लंघन नाक्षत्र घड़ी के २ बजे और दो महीने में नाक्षत्र घड़ी के ४ बजे होगा, इत्यादि । इस प्रकार प्रत्यक्ष है कि सूर्य का उदय अस्त नाक्षत्र घड़ी के अनुसार दिन के किसी समय हो सकता है जो लौकिक व्यवहार के लिए उपयोगी नहीं हो सकता क्योंकि साधारणतः सूर्य के उदय अस्त और यामोत्तरोल्लंघन से ही समय का निश्चय करना सुगम होता है । इस दुविधा को मिटाने के लिये ज्योतिषियों ने यह निश्चय किया है कि ज्योतिष के काम के लिए तो ऐसी ही घड़ियाँ काम में लायी जायें जिनसे नाक्षत्रकाल सूचित होता है, परन्तु लौकिक व्यवहार वाली घड़ियाँ ऐसी हों जिनसे मध्यम सावन दिन के घंटे मिनट सेकंड अथवा घड़ी, पल सूचित हो । ऐसा करने से इन घड़ियों का समय स्पष्ट सावन दिन सूचित करने वाली धूपघड़ियों से कुछ भिन्न अवश्य रहता है परन्तु यह भिन्नता १६ मिनट से अधिक नहीं बढ़ने पाती । मध्यम सावन दिन का मान कई वर्षों के स्पष्ट सावन दिनों का मध्यम मान (औसत) होता है । १९०६ ई० के ऊपर लिखे हुए चार दिनों का मध्यम मान २४ घंटा ३ मिनट ५७.१ सेकंड होता है जो एक सावन दिन के मध्यम मान के बहुत निकट है । यदि कई वर्षों के स्पष्ट सावन दिनों के मानों का मध्यम मान निकाला जाय तो एक मध्यम सावन दिन नाक्षत्र काल के २४ घंटा ३ मिनट ५६.५५५ सेकण्ड के समान होता है । नीचे के उदाहरण से स्पष्ट होगा कि मध्यम सावन दिन का मान वेध से कैसे जाना जाता है । मध्यम सावन दिन का मान निश्चय करना १८३६ ई० की ४थी जुलाई के दिन जिस समय स्पष्ट सूर्य का केन्द्र यामोत्तर-