सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४० सूर्य-सिद्धान्त १ मध्यम सावन दिन = २४ घंटा ३ मिनट ५६.५५५ सेकण्ड (नाक्षत्र) मध्यम और स्पष्ट सावन दिनों का भेद समझाने के लिए ज्योतिषियों ने एक ऐसे सूर्य की कल्पना की है जो विषुवद्वृत्त पर सदैव समान गति से चलता हुआ माना गया है और नाक्षत्र काल के २४ घंटा ३ मिनट ५४.५५५ सेकण्ड पीछे प्रतिदिन यामोत्तर वृत्त पर आता है। जिस क्षण यह कल्पित सूर्य यामोत्तरोल्लङ्घन करता है उसी क्षण मध्यम मध्यान्ह होता है और मध्यम काल सूचित करनेवाली घड़ियों में ठीक १२ बजता है। यह ऊपर बतलाया गया है कि वर्ष भर के स्पष्ट सावन दिनों का मध्यममान ही मध्यम सावन दिन के समान होता है इसलिए यह प्रकट है कि जितने समय में उपर्युक्त कल्पित सूर्य विषुवद्वृत्त पर चलता हुआ एक चक्कर पूरा कर लेता है उतने ही समय में स्पष्ट सूर्य क्रान्तिवृत्त पर चलता हुआ एक चक्कर पूरा करता है। इसलिए क्रान्तिवृत्त पर स्पष्ट सूर्य की जो मध्यम दैनिक गति होती है वह विषुवद्वृत्त पर इस कल्पित सूर्य की गति होती है। इससे सिद्ध है कि समान काल में कल्पित सूर्य का विषुवांश उतना ही बढ़ता है जितना स्पष्ट सूर्य का भोगांश बढ़ता है। ३२० पृष्ठ की सारिणी से* प्रकट है कि जब तक स्पष्ट सूर्य का भोगांश ९० अंश से कम होता है तब तक इसका विषुवांश भोगांश से कम रहता है। परन्तु उपर्युक्त कल्पित सूर्य का विषुवांश सदैव स्पष्ट सूर्य के मध्यम भोगांश के समान होता है। इसलिए यह सिद्ध है कि जब तक कल्पित सूर्य का विषुवांश अथवा सूर्य का मध्यम भोगांश ६० अंश से कम होता है तब तक कल्पित सूर्य का ध्रुवप्रोतवृत्त स्पष्ट सूर्य के ध्रुवप्रोतवृत्त से पूर्व की ओर होता है। इसलिए स्पष्ट सूर्य का ध्रुवप्रोतवृत्त कल्पित सूर्य से पहले यामोत्तर वृत्त पर आता है और स्पष्ट मध्याह्न मध्यम मध्याह्न से पहले होता है। इसलिए जिस समय धूप घड़ी में जो स्पष्ट सूर्य के अनुसार समय बतलाती है १२ बजता है उससे पीछे मध्यमकाल बतलाने वाली घड़ियों में १२ बजेगा। अर्थात् धूपघड़ी मध्यम घड़ी से तेज होगी। जितना तेज होगी उतना ही धूपघड़ी के समय से घटाने पर मध्यम घड़ी का समय ज्ञात होगा। इसी प्रकार जब तक स्पष्ट सूर्य का मध्यम भोगांश ६० अंश से अधिक और १८० अंश से कम होगा अर्थात् जब सूर्य सायन कर्क से सायन कन्या राशि में रहेगा
- इस सारिणी में जो भोगांश दिया हुआ है उसे कल्पित सूर्य का विषुवांश और जो विषुवांश दिया हुआ है उसे स्पष्ट सूर्य का विषुवांश समझ लेने से यह स्पष्ट हो जाता है कि किस समय स्पष्ट सूर्य का ध्रुवप्रोतवृत्त कल्पित सूर्य के ध्रुवप्रोतवृत्त के आगे या पीछे है।