सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविप्रश्नाधिकार ३४५ $+\frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} ज्या [ ४ भा + ८ च ज्या (भा - नी) ]$ इसमें से चौथा पद $= -स्परे^२ \frac{क}{२} { ज्या २ भा \times कोज्या [ ४ च ज्या (भा - नी) ]$ $\qquad\quad + कोज्या २ भा \times ज्या [ ४ च ज्या (भा - नी) ] }$ $= -स्परे^२ \frac{क}{२} { ज्या २ भा + कोज्या २ भा \times ४ च ज्या (भा - नी) }$ क्योंकि ४ च ज्या (भा - नी) बहुत छोटा कोण है इसलिए इसकी कोटिज्या एक के समान होगी और इसकी ज्या इसी के समान होगी । (देखो Hall and Knight's Trigonometry पृष्ठ २६२) इसी प्रकार पाँचवां पद $= \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} { ज्या ४ भा \times कोज्या [ ८ चज्या (भा - नी) ]$ $\qquad\quad + कोज्या ४ भा \times ज्या [ ८ च ज्या (भा - नी) ] }$ $= \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} { ज्या ४ भा + कोज्या ४ भा \times ८ च ज्या (भा - नी) }$ $= \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} ज्या ४ भा$ क्योंकि इसके दूसरे पद का गुणक .०००१ से भी कम है इसलिए व $= भा + २ चज्या (भा - नी) + \frac{५}{४} च^२ ज्या २ (भा - नी)$ $\quad - स्परे^२ \frac{क}{२} { ज्या २ भा + ४ चज्या (भा - नी) \times कोज्या २ भा }$ $\quad + \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} ज्या ४ भा\cdots \hfill (५)$ परन्तु २ ज्या भा $-$ नी) $\times$ कोज्या २ भा $\quad = ज्या (भा - नी + २ भा) + ज्या (भा - नी - २ भा)$ $\quad = ज्या (३ भा - नी) - ज्या (भा + नी)$ इसलिए यदि समीकरण (५) सरल किया जाय और इसके पद बड़ाई छुटाई के अनुसार क्रम से लिखे जायें तो $\quadव = भा + २च ज्या (भा - नी) - स्परे^२ \frac{क}{२} [ ज्या २ भा ]$