भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 37

१४ सूर्य सिद्धान्त प्रवर्तमानस्याद्य ब्रह्मणो द्वितीये परार्धे श्री श्वेतवाराह कल्पे वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशति तमे कलियुगे कलि प्रथम चरणे...बौद्धावतारे वर्तमानेऽस्मिन् वर्तमाने संवत्सरेऽमुकनाम वत्सरेऽमुकायने अमुक ऋतौ अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुक- वासरे अमुकनक्षत्रे संयुक्ते चन्द्रे...तिथौ...। आर्यभट के मत से कल्प के आरम्भ से कलियुग के आरम्भ तक का समय = ६ मनु + २७ चतुर्युग + ३/४ चतुर्युग† = ६ × ७२ + २७ + ३/४ चतुर्युग = ४३२ + २७ + ३/४ चतुर्युग = ४५९ ३/४ × ४३, २०,००० सौर वर्ष = (४६० - १/४) × ४३, २०,००० " = १,९८,७२,००,००० - १०,८०,००० सौर वर्ष = १,९८,६१,२०,००० सौर वर्ष । इसमें यदि ५०२३ वर्ष और जोड़ दिये जायें तो १६७६ वि० में कल्प के आरम्भ से जितने सौर वर्ष बीते हैं वह निकल आवेंगे । ब्रह्मगुप्त भास्कराचार्य इत्यादि ने आर्यभट के इस मत को नहीं माना है । उनके मत से कल्प के आरम्भ से अब तक की सौर वर्षों की संख्या वही आती है, जो सूर्य सिद्धान्त के अनुसार आती है । बीते हुए ६ मन्वन्तरों के नाम हैं—(१) स्वायम्भुव, (२) स्वारोचिष, (३) औत्तमि, (४) तामस, (५) रैवत और (६) चाक्षुष । वर्तमान मन्वन्तर का नाम वैवस्वत है । वर्तमान कल्प को श्वेत-वाराह-कल्प कहते हैं । ग्रहर्क्षदेवदैत्यादिसृजतोस्य चराचरम् । कृताद्रिवेदा दिव्याब्दाः शतघ्ना वेधसो गताः ॥२४॥ अनुवाद—ग्रह, नक्षत्र, देव, दैत्य, मनुष्य, पशु, पक्षी, पर्वत, वृक्ष इत्यादि चराचर जगत के बनाने में ब्रह्मा को ४७,४०० दिव्य वर्ष अथवा ४७,४०० × ३६० = १,७०,६४,००० सौर वर्ष लग गये । (इसलिए कल्प के आदि से इतने समय के बाद सारी सृष्टि तैयार हुई) ॥ २४ ॥ विज्ञान भाष्य—सूर्य सिद्धान्त का यह मत है कि कल्प के आदि में सृष्टि की रचना नहीं थी । इसके लिए ब्रह्मा को १,७०,६४,००० सौर वर्ष लगाने पड़े थे । †काहो मनवोढ (१४) मनुयुग शख (७२) गतास्ते च (६) मनुयुग छना (२७) च । कल्पादेर्युगपादा ग (३) च गुरु दिवसाच्च भारतात्पूर्वम् ॥ ३ ॥ आर्य- भटीय प्रथम पाद, बा० उदयनारायण सिंह द्वारा संपादित ।