सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४८ सूर्य-सिद्धान्त स्पष्ट सावन काल* = ना - व उसी समय मध्यम सूर्य का नतकाल ना - भा है ∴ मध्यम सावन काल = ना - भा = (ना - व) + (व - भा) = स्पष्ट सावन काल + काल समीकरण इसलिए यह सिद्ध हो गया कि काल समीकरण वह समय है जिसे स्पष्ट सावन काल में बीजगणित की रीति से जोड़ देने पर मध्यम सावन काल आ जाता है । उदाहरण—१६७६ वि० की बसंत पंचमी की मध्यरात्रि के समय काल समीकरण क्या है ? पहले सूर्य का मध्यम सायन भोगांश जानना चाहिए । इस समय सूर्य का मध्यम स्थान ६ रा० ०° १२′ ६′′ था (देखो पृष्ठ १४७) । १६७६ वि० की मेष संक्रान्तिकाल में अयनांश २२° ३७′ ३८′′ था (देखो पृष्ठ २५२) । मेष संक्रान्ति से २८३ दिन पीछे इस वर्ष वसंत पंचमी हुई थी (देखो पृष्ठ ३६) । इसलिए २८३ दिन में अयन की गति ५८′′.६६ × २८३ / ३६५.२५ = ४५′′.५ इसलिए वसंत पंचमी की मध्यरात्रि में मध्यम अयनांश २२° ३७′ ३८′′.१ + ४५′′.५ = २२° ३८′ २३′′.६ हुआ । स्पष्ट अयनांश जानने के लिए अक्ष विचलन संस्कार भी करना चाहिए परन्तु विस्तार के भय से यह संस्कार छोड़ दिया जाता है । इसलिए २२° ३८′ २३′′.६ को ही स्पष्ट अयनांश मान लिया जाता है । अब, सूर्य का मध्यम स्थान = ६ रा० ०° १२′ ६′′ अयनांश = २२° ३८′ २४′′ ∴ सूर्य का सायन मध्यम भोगांश = १० रा० ०° ५०′ ३३′′ = ३००° ५०′ ३३′′ इसलिए सूत्र (८) के अनुसार, काल समीकरण = २३′.१७ ज्या ३००° ५०′ ३३′′
- ११२′.८३ कोज्या ३००° ५०′ ३३′′ बतलाया गया है । यदि यामोत्तरोल्लंघन काल से २२ घंटा समय हो गया है तो कहेंगे कि नतकाल २२ घंटा है यद्यपि प्राचीन मतानुसार इस समय पूर्वनत २ घंटा होगा ।
- यहाँ सावन काल का आरम्भ मध्यान्ह से माना गया है ।