सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ सूर्य-सिद्धान्त चित्र ७० परिमाण व माना जाय तो ता (व) अर्थात् व की तत्कालिक गति पासवाले किसी दो स्तरों के वर्तनों का अन्तर और ता (धा) अर्थात वर्तनांक की तात्कालिक गति उन्हीं दो स्तरों के वर्तनांकों का अन्तर हुआ । यदि आ और इ इन दोनों स्तरों के वर्तित कोण तथा धा, धि इनके वर्तनांक हों तो आ - इ = ता (व) और धि - धा = ता (धा) ∵ इ = आ - ता (व) और धि = धा + ता (धा) परन्तु का × धा × ज्या आ = कि × धि × ज्या इ यदि वातावरण के दो पतले स्तर बहुत पास हों तो उनकी त्रिज्याएँ प्रायः समान होती हैं इसलिए का = कि । ऐसी दशा में धा × ज्या आ = धि × ज्या इ = [धा + ता (धा) ] × ज्या [आ - ता (व)] = [धा + ता (धा)] × [ज्या आ × कोज्या ता (व) - कोज्या आ × ज्या ता (व)] परन्तु ता (व) बहुत छोटा और चापीय मान में है इसलिए ज्या ता (व) = ता (व) और कोज्या ता (व) = १