सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविप्रश्नाधिकार ३६६ $\therefore$ घा $\times$ ज्या आ $=$ [घा $+$ ता (धा)] [ज्या आ $-$ ता (व) $\times$ कोज्या आ] $=$ घा $\times$ ज्या आ $-$ घा $\times$ ता (व) $\times$ कोज्या आ $+$ ता (धा) $\times$ ज्या आ क्योंकि चौथे पद में ता (धा) और ता (व) के गुणनफल का गुणक (coefficient) बहुत छोटा है इसलिए छोड़ दिया गया है । $\therefore \circ =$ ता (धा) $\times$ ज्या आ $-$ घा $\times$ ता (व) $\times$ कोज्या आ $\therefore \frac{ज्या आ}{घा \times कोज्या आ} = \frac{ता (व)}{ता (धा)}$ अथवा $\frac{ता (व)}{ता (धा)} = \frac{स्परे आ}{घा}$ \hfill (२) समीकरण (१) और (२) से ऐसा समीकरण जाना जा सकता है जिसमें आ न रहे । समीकरण (१) से ज्या आ $= \frac{क \times ध \times ज्या न}{क \times घा}$ त्रिकोणमिति के यह प्रकट है कि स्परेआ $= \frac{ज्या आ}{\sqrt{(१ - ज्या^२ आ)}}$ $= \frac{\frac{क \times ध \times ज्या न}{का \times घा}}{\sqrt{( १ - \frac{क^२ \times ध^२ \times ज्या^२ न}{का^२ \times घा^२} )}}$ $= \frac{क \times ध \times ज्या न}{\sqrt{(का^२ \times घा^२ - क^२ \times ध^२ \times ज्या^२ न)}}$ $\therefore \frac{ता ( व )}{ता (धा )} = \frac{१}{घा} \times \frac{क \times ध \times ज्या न}{\sqrt{(का^२ \times घा^२ - क^२ \times ध^२ \times ज्या^२ न)}}$ यही ज्योतिष सम्बन्धी वर्तन का साधारण चलन-समीकरण (differential equation) है। यदि सबसे ऊपरवाले स्तर का वर्तनांक १ और सबसे नीचेवाले स्तर का वर्तनांक ध मान लिये जाय और उपर्युक्त चलन समीकरण का इन्हीं सीमाओं के बीच चलराशिकलन (Integration) किया जाय तो ज्योतिष सम्बन्धी वर्तन का पूरा ज्ञान किया जा सकता है। परन्तु ऐसा करने में कठिनाई यह पड़ती है कि इस चलन समीकरण में का और धा दो चल राशियाँ (Variables) हैं जिनका परस्पर सम्बन्ध ज्ञात नहीं हो सकता क्योंकि हमें इस बात का ठीक-ठीक पता नहीं है कि २४