सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
पृष्ठ 394, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 394
त्रिप्रश्नाधिकार ३७१ इस कल्पना में यह मान लेना पड़ता है कि शून्य से आती हुई किरण वाता- वरण में प्रवेश करते ही एक बार झुक जाती है और फिर वही दिशा पृथ्वी तल तक बनी रहती है । मान लो स च छ एक किरण है जो च विन्दु पर झुकी हुई है । चित्र ७१ पृथ्वी की त्रिज्या = भ छ = क भ च = क (१+छ) जबकि छ बहुत छोटा है जैसा कि पहले बतलाया गया है । अ = आपात कोण = ∠ स च ल = ∠ स च सा + ∠ ल च सा = वर्तन + वर्तित कोण = व् + ∠ छ च भ = व् + वा ∠ ख छ च = स्पष्ट नतांश