सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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३७२ सूर्य-सिद्धान्त वर्त्तन के नियम के अनुसार ज्या अ = ध × ज्या वा या ज्या (व + वा) = ध × ज्या वा जहाँ ध वातावरण का वर्त्तनांक है । यह स्पष्ट है कि व बहुत छोटा होता है । इसलिए ज्या (व + वा) = ज्या व × कोज्या वा + कोज्या य × ज्या वा = व × कोज्या वा + ज्या वा ∵ ज्या वा + व × कोज्या वा = ध × ज्या वा ∴ व = (ध - १) स्परे वा त्रिभुज भ छ च में, ज्या वा / ज्या न = क / क (१ + छ) = १ / १ + छ ज्या वा = ज्या न / १ + छ परन्तु स्परे वा = ज्या वा ÷ कोज्या वा = ज्या वा ÷ √(१ - ज्या² वा) = ज्या न / १ + छ ÷ √(१ - ज्या² न / (१ + छ)²) = ज्या न / √{(१ + छ)² - ज्या² न} ∴ व = (ध - १) ज्या न / √ {(१ + छ)² - ज्या² न} = (ध - १) ज्या न / √{१ + २ छ + छ² - ज्या² न} छ² बहुत छोटा है इसलिए छोड़ दिया जा सकता है। ऐसी दशा में व = (ध - १) ज्या न / √(कोज्या² न + २ छ) = (ध - १) ज्या न / √(१ + २ छ / कोज्या² न) × कोज्या न = (ध - १) स्परे न / √(१ + २छ × छे² न) *
- Secant को छेदन रेखा कहते हैं जो Cosine अर्थात् कोटिज्या का विलोम होता है । छेदन रेखा का संक्षिप्त रूप छे माना गया है। इसी तरह Cosecant अर्थात् कोटिछेदन रेखा का संक्षिप्त रूप कोछे प्रयोग किया जाता है।