सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार ३८१ = ३५' / कोज्या २५° १८' = ३५' / .६०४१ = ३८'.७ = ३८.७ असु = ६ पल के लगभग ∵ सायन मेष या तुला संक्रान्तियों के दिन वेधसिद्ध उदयकालिक नतकाल = १५ घड़ी ६ पल ∵ इन दिनों में वेधसिद्ध या स्पष्ट दिनमान = ३० घड़ी १२ पल इस प्रकार सिद्ध है कि सायन मेष और सायन तुला संक्रान्ति के दिन वर्त्तन के कारण दिनमान रात्रिमान से १२ पल अधिक होता है। यह प्रसिद्ध बात है कि इन दिनों में दिनमान और रात्रिमान सब स्थानों में समान होते हैं। इसलिए यदि कोई सूर्य के उदय से अस्त तक के समय को वेध से नापकर विलोम रीति से सायन मेष और तुला संक्रान्ति का दिन जानना चाहे तो वह निश्चय करेगा कि सायन मेष संक्रान्ति यथार्थ संक्रान्ति काल से ३ दिन पहले और सायन तुला संक्रान्ति यथार्थ संक्रान्ति से ३ दिन पीछे पड़ेगी । मकरन्द सारिणी के पृष्ठ १३ में काशी के लिए महत्तम दिनमान का परिमाण ३४ घड़ी ५ पल और लघुतम दिनमान का २५ घड़ी ५५ पल दिया हुआ है। इससे यह सिद्ध होता है कि इस सारिणी में कर्क संक्रान्ति के दिन उदयकालिक नतकाल का परिमाण १७ घड़ी २.५ पल निश्चय किया गया था । अब यह देखना कि मकरन्द- कार ने गणित से अथवा वेध से यह दिनमान निश्चय किया था । सूर्य-सिद्धान्त ने सूर्य की महत्तम क्रान्ति २४° माना है । इसलिए अनुमान होता है कि मकरन्दकार ने गणित से चरकाल जानने के लिए इसी क्रान्ति का उपयोग किया होगा । यह पता नहीं कि काशी का अक्षांश उन्होंने क्या माना था । आजकल यह २५° १८' के लगभग निश्चय हुआ है । इसलिए यह मान लेने में कोई हानि नहीं जान पड़ती कि मकरन्दकार ने काशी का अक्षांश २५° माना होगा । यदि २५° अक्षांश माना गया हो तो सायन कर्क संक्रान्ति के दिन काशी में सूर्य की चरज्या = स्परे २४° × स्परे २५° = .४४५२ × .४६६३ = .२०७६ ∴ चरांश = ११°५६' = ७१६ चरासु = १२० पल = २ घड़ी