भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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३६८ सूर्य-सिद्धान्त इसलिए सूत्र (३) के पहले पद का लघुरिक्थ = ३.४२१३६२ ∵ पहला पद = २६३८''.५३ लरि प² = २ लरि प = ६.३२८७ ज्या २ ध = ज्या २ x ६१° १०' ४७''.४ = ६.६२६७ लरि कोछेर २'' = ५.०१३४ ∴ दूसरे पद का लघुरिक्थ = १.२६८८ ∵ दूसरा पद = + १८''.५७ लरि प³ = ३ लरि प = ४.४६३ लरि ज्या ३ घ = लरि ज्या ३ x ६१° १०' ४७''.४ = ८.७६१ ऋणात्मक लरि कोछेर ३'' = ४.८३७ ∴ तीसरे पद का लघुरिक्थ = ८.१२१ ऋणात्मक ∵ तीसरा पद = - ०''.०१ ∴ ली = २६३८''.५३ + १८''.५७ - ०''.०१ = २६५०''.०६ = ४४' १७''.०६ = ४४' १७''.१ ∵ चंद्रमा का स्पष्ट नतकाल = ६१° १०' ४७''.४ + ४४' १७''.१ = ६१° ५५' ४''.५ यदि वही स्पष्ट नतकाल दिया होता तो सूत्र (१) से विषुवांश लंबन इस प्रकार जाना जाता :- लरि ज्या ली = लरि प + लरि ज्या ६१° ५५' ४''.५ = ८.१६४३६५ x ६.६४५६०४ = ८.१०६६६६ ∴ ली = ४४' १७''.०६ इस प्रकार किसी स्थान के विषुवांश लंबन की सारिणी तैयार की जा सकती है । चन्द्रमा का क्रान्ति लम्बन (Parallax in declination) जानना इस काम के लिए भी चित्र ७७ काम देगा । मान लो कि चंद्रमा की यथार्थ क्रान्ति क, यथार्थ नतांश न और यथार्थ नतकाल घ है और लंबन के कारण चंद्रमा की स्पष्ट क्रान्ति, स्पष्ट नतांश और स्पष्ट नतकाल क्रमानुसार का, ना, और घा हैं।