भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 435, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 435

४१२ सूर्य-सिद्धान्त इसलिए धनु अ द फ = ६०° = धनु पू अ द । यदि दोनों धनुओं से सामान्य खंड अ द निकाल दिया जाय तो अ पू = द फ गोलीय त्रिभुज अ त पू में ज्या ( अ पू ) ज्या ( अ त ) ────────── = ────────── ज्या अ त पू ज्या अ पू त परन्तु अ त पू विषुवद्वृत्त और क्रान्तिवृत्त के बीच का कोण अर्थात् सूर्य की परम क्रान्ति है और अ पू त कोण व द धनु के समान है जो स स्थान का लम्बांश है । परम क्रान्ति ज्या × ज्या ( त अ ) ∴ ज्या ( अ पू ) = ───────────────────────── लम्बज्या यही सूर्यग्रहणाधिकार के तीसरे श्लोक का तात्पर्य है । इसी ज्या अ पू का नाम उदय या उदय ज्या रखा गया है । परन्तु अ पू = द फ, जो म ख न कोण के समान है । अब यदि गोलीय समकोण त्रिभुज म ख न के धनु म ख का ज्ञान हो जाय तो धनु ख न का मान सहज ही जाना जा सकता है क्योंकि कोण ख न म समकोण है । यह स्पष्ट ही है कि म ख मध्य लग्न का नतांश है जो मध्य लग्न की उत्तर क्रान्ति व म और इष्ट स्थान के अक्षांश व ख का अन्तर है । क्रान्ति दक्षिण होती तो जोड़ना पड़ता । म ख की ज्या का नाम मध्य ज्या रखा गया है यह जानने की रीति उसी अधिकार के ४थे और ५वें श्लोकों में बतलाई गयी है । इसलिए समकोण गोलीय त्रिभु ख न म में ज्या ( न ख ) =ज्या ( ख म न ) × ज्या ( म ख ) यदि गोलीय त्रिभुज ख न म को समतल त्रिभुज (plane triangle ) मान लिया जाय तो ज्या ( ख म न ), =कोज्या ( म ख न) क्योंकि ख म न और म ख न का योग ६०° के समान होगा । इसलिए ज्या ( न ख ) =कोज्या ( म ख न ) ज्या ( म ख ) =कोज्या ( द फ ) × ज्या ( म ख ) =ज्या ( म ख ) √१ - ज्या² ( द फ ) =√ ज्या² ( म ख ) - ज्या² ( म ख) ज्या² ( द फ ) ∴ दृक् क्षेप = √मध्यज्या² - मध्यज्या² × उदय² दृग्गति = √१ - दृक्षेप²