भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

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४१४ सूर्य-सिद्धान्त परन्तु हमें द च दा कोण के जानने की आवश्यकता नहीं है । हमको तो द या दा से च का लम्बन जानना है अर्थात् हमको द च भ या दा च भ कोण जानना है जो द और दा से च के लम्बन हैं । मान लो द च भ = ल और दा च भ = ला और द च दा = च । अब ज्या ल = ज्या न × भ द / भ च ज्या ला = ज्या ना × भ दा / भ च = ज्या ना × भ द / भ च क्योंकि भ द और भ दा दोनों पृथ्वी की त्रिज्याएँ हैं इसलिए समान मानी जा सकती हैं । इसलिए ज्या ल / ज्या न = ज्या ला / ज्या ना अथवा ज्या ला = ज्या ला × ज्या न / ज्या ना परन्तु ल = च - ला ∴ ज्या ( च - ला ) = ज्या ला × ज्या न / ज्या ना

[Diagram: च at top vertex. ख on upper-left ray from center/surface. खा on upper-right ray from center/surface. Points on circle / geometry: द, व, दा, उ, भ (center), वा (bottom). ]

चित्र ८०