भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार ४१५ ⸫ ज्या च कोज्या ला — कोज्या च ज्या ला = ज्या ला ✕ ज्या न ————— ज्या ना यदि इस समीकरण के प्रत्येक पक्ष को ज्या च ज्या ला से भाग दिया जाय तो कोस्परे ला — को स्परे च = ज्या न ——————— ज्या च ज्या ना अथवा कोस्परे ला = कोस्परे च + ज्या त ——————— ज्या च ज्या ना इस प्रकार यह सिद्ध है कि यदि दो स्थानों से किसी ग्रह का नतांश वेध करके जान लिया जाय तो उन स्थानों के अक्षांशों के ज्ञान से द च दा कोण अर्थात् च की जानकारी हो सकती है। फिर च से ला की जानकारी उपर्युक्त समीकरण से की जा सकती है। यह तो स्पष्ट ही है कि चन्द्रमा को छोड़कर अन्य ग्रहों के लम्बन बहुत छोटे होते हैं इसलिए यदि इनके लम्बनों की ज्याओं के स्थान में इनके धनु ही रखे जायें तो कोई हानि नहीं हो सकती। ऐसी दशा में ज्या ( च — ला ) = ज्या ला ✕ ज्या न की जगह ————— ज्या ना च — ला = ला ✕ ज्या न लिखा जा सकता है। ————— ज्या ना ⸫ च = ला + ला ✕ ज्या न ————— ज्या ना = ला ( १ + ज्या न ) ————— ज्या ना = ला ✕ ज्या ना + ज्या न ———————————————— ज्या ना ⸫ ला = च ज्या ना ——————————————— ज्या न + ज्या ना = च ज्या ना ————————————————————————————————————— २ ज्या न + ना कोज्या न — ना (क) —————— —————— २ २ इस सूत्र से किसी ग्रह का वेध करके उसका साधारण लम्बन या क्षितिज लम्बन जाना जा सकता है क्योंकि यदि क्षितिज लम्बन लि हो तो