सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 475, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ें४५० सूर्य-सिद्धान्त चित्र ९४ कोई कक्षा = ३६०° = २१,६००' ∵ सूर्य की कक्षा भी २१,६०० कला के समान है परन्तु योजनों में यह ४३,३१,५०० के समान है इसलिए २१६००' = ४३,३१,५०० योजन ∵ ३२.५' = (३२.५ × ४३३१५००) / २१६०० योजन = ६५१७ योजन सूर्य-सिद्धान्त ने सूर्य का मध्यम व्यास ६५०० योजन माना है इससे प्रकट होता है कि इस ग्रन्थ में सूर्य का उदयकालिक बिम्ब ३२' ३०" से कम लिया गया है जो ठीक भी है क्योंकि वर्तन के कारण उदयकालिक बिम्ब यथार्थ से कुछ बड़ा देख पड़ता है । इस तरह यह सिद्ध है कि सूर्य या चन्द्र बिम्बों का योजनात्मक मान कलात्मक मानों से ही जाना गया है । मध्यम व्यास से स्फुट व्यास जानने का जो नियम बतलाया गया है वह कुछ स्थूल है क्योंकि सूर्य या चन्द्रमा की स्फुटगति का परिवर्तन उसी अनुपात से नहीं होता चित्र ९५