सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५२ सूर्य-सिद्धान्त $\frac{म}{र} =$ सूर्य की कक्षा और $\frac{म}{च} =$ चन्द्रकक्षा यदि दूसरे समीकरण के प्रत्येक पक्ष को पहले समीकरण के समपक्ष (corres- ponding sides) से भाग दे दिया जाय तो $\frac{म}{च} \div \frac{म}{र} = \frac{चन्द्रकक्षा}{सूर्य की कक्षा}$ अथवा $\frac{र}{च} = \frac{चन्द्रकक्षा}{सूर्य की कक्षा}$ इस प्रकार सूर्य के स्फुट व्यास का पहला नियम भी सिद्ध हो गया । यहाँ यह बतला देना आवश्यक है कि सूर्य का स्फुट व्यास तथा सूर्य की कक्षा का विस्तार यथार्थ में उतना नहीं है जितना हमारे सिद्धान्त ग्रन्थों में बतलाया गया है । अनेक बेधों से यह सिद्ध हो गया कि सूर्य का लम्बन ९ कला से अधिक नहीं होता इसलिए पृथ्वी से इसकी दूरी लम्बन के सूत्र के अनुसार (देखो त्रिप्रश्नाधिकार पृष्ठ ३८४) ९ करोड़ २६ लाख मील है और इसके पिंड का व्यासार्ध ४, ३२, ८६० मील है (देखो पृष्ठ ६६) । यदि योजन का परिमाण ५ मील के समान समझा जाय (देखो पृष्ठ ५४) तो सूर्य का व्यासार्ध = $\frac{४३२८६०}{५} =$ ८६५७८ योजन, और सूर्य की मध्यम दूरी = $\frac{९,२६,००,०००}{५} =$ १,८५,२०,००० योजन यह परिमाण हमारे सिद्धान्त के परिमाणों से कितना भिन्न है यह नीचे की तालिका से स्पष्ट हो जायगा जहां सब परिमाण योजनों में दिये जाते हैं :-
| सूर्यसिद्धान्त | सिद्धान्त शिरोमणि | R. S. Ball's Spherical Astronomy |
|---|---|---|
| सूर्य बिंब का व्यास | ६५०० | ६५२२ |
| सूर्य की मध्यम दूरी | ६८८३७८ | ६८८३७७ |
| चन्द्र बिंब का व्यास | ४८० | ४८० |
| चन्द्रमा की मध्यम दूरी | ५१५६६ | ५१५६६ |