भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

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४८४ सूर्य-सिद्धान्त

में कोई महीना मलमास का पड़ता है । इस प्रकार चैत्र की अमावस्या श्रावणी पूर्णिमा तक ४।। चान्द्रमास होते हैं । १ चान्द्रमास = २९.५३०५८८ दिन ४ ,, = ११८.१२२३५२ दिन आधा ,, = १४.७६५२६४ ,, ∴ ४।। ,, = १३२.८८७६४६ ,, इसलिए १६८१ वि० के चैत्र की मध्यम अमावास्या से १३२.८८७६४६ दिन उपरान्त श्रावण की मध्यम पूर्णिमा का अन्त होगा । परन्तु चैत्र की अमावास्या से ८.४४२२३६ सावन दिन पर स्पष्ट मेष-संक्रान्ति होती है इसलिए स्पष्ट मेष-संक्रान्ति काल से १३२.८८७६४६ — ८.४४२२३६ = १२४.४४५४१० दिन उपरान्त श्रावण की मध्यम पूर्णिमा का अंत होगा । कलियुगादि से १६८१ की मेष संक्रान्ति तक १८३५४२३.०७८२ दिन मेष-संक्रान्ति से श्रावणी पूर्णिमा तक १२४.४४५४ ,, कलियुगादि से श्रावणी पूर्णिमा तक १८३५५४७.५२३६ दिन इसलिए १६८१ वि० की श्रावणी पूर्णिमा की मध्य रात्रि का अहर्गण १८३५५४७ हुआ । इसकी शुद्धता की परीक्षा करने के लिए यह जानना चाहिए कि इस अहर्गण से श्रावणी पूर्णिमा का बार ठीक आता है कि नहीं । इसलिए इसको ७ से भाग देना चाहिए । सात से भाग देने पर २६२२२१ सप्ताह आते हैं और शेष कुछ नहीं बचता । इसलिए सिद्ध होता है कि श्रावणी पूर्णिमा गुरुवार को थी क्योंकि कलियुग का आरम्भ सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार गुरुवार की मध्यरात्रि को हुआ था । इस प्रकार संवत् १६८१ वि० की श्रावणी पूर्णिमा गुरुवार की मध्यरात्रि का अहर्गण १८३५५४७ हुआ । इसी अहर्गण से श्रावणी पूर्णिमा की अर्ध्य रात्रि काल के सूर्य, चन्द्रमा, चन्द्रोच्च, राहु इत्यादि के स्थान त्रैराशिक से जानने चाहिए । मध्यमाधिकार में बतलाया गया है कि एक महायुग में १५७७६१७८२८ सावन दिन होते हैं जिनमें सूर्य के ४३२०००० भगण, चंद्रमा के ५७७५३३३६ भगण, चन्द्रोच्च के ४८८२०३ भगण और राहु के २३२२३८ भगण होते हैं, इसलिए १८३५५४७ दिनों में भगण राशि अंश कला सूर्य के ५०२५ ३ २६ ५६.७५ हुए चंद्रमा के ६७१८२ ६ २३ ३६.२१ ,, चंद्रोच्च के ५६७ १० २८ ३४.०२ ,, राहु के २७० १ २६ ६.८ ,,