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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२६ सूर्य सिद्धान्त परिक्रमा कर लेते हैं। इसी परिक्रमा को नाक्षत्र भगण कहते हैं। इसलिए एक महायुग में जितने नाक्षत्र भगण होते हैं उतने ही नाक्षत्र-अहोरात्र होते हैं । ऊपर के श्लोक के पिछले भाग में यह जानने की रीति बतलायी गयी है कि एक महायुग में कौन ग्रह कितने बार पूर्वक्षितिज में उदय होता है। एक महायुग में ग्रह के जितने भगण होते हों उसको एक महायुग के नाक्षत्र भगण की संख्या से घटा दो; शेष जो संख्या होगी उतने ही बार वह ग्रह एक महायुग में पूर्व-क्षितिज में उदय होगा । मान लो कि यह जानना है कि सूर्य पूर्व-क्षितिज में एक महायुग में कितनी बार उदय होता है। २६वें श्लोक में बतलाया गया है कि सूर्य एक महायुग में ४३,२०,००० भगण करता है। इसको यदि महायुगीय नाक्षत्र भगण १,५८,२२,३७, ८२८ में से घटा दिया जाय तो शेष १,५७,७६,१७,८२८ होता है । इतने ही बार सूर्य पूर्व क्षितिज में एक महायुग में उदय होता है। परन्तु १२वें श्लोक के विज्ञान- भाष्य में यह बतलाया गया है कि सूर्य के एक उदय से दूसरे उदय तक के समय को सावन दिन कहते हैं। इसलिए ३४वें श्लोक के अनुसार १ महायुग में १,५७,७६,१७, ८२८ सावन दिन होते हैं। इसी तरह और ग्रहों के उदय की संख्या भी जानी जा सकती है। इसकी उपपत्ति यह हैः-यदि किसी दिन सूर्य किसी तारे के साथ उदय हो तो दूसरे दिन वह तारा सूर्य से कोई ३ मिनट ५६ सेकंड पहले उदय होता है। क्योंकि इतने समय में सूर्य कोई एक अंश पूर्व की ओर चला जाता है। तीसरे दिन वह तारा सूर्य से ३ मिनट ५६ सेकंड के दूने समय अर्थात् ७ मिनट ५२ सेकंड पहले उदय होगा, चौथे दिन उसके तिगुने समय पहले और १६वें दिन उसके १५गुने समय पहले अर्थात् ५६ मिनट वा १ मिनट कम १ घंटा पहले वह तारा उदय होगा । इस तरह पिछड़ते पिछड़ते ३६१वें दिन अर्थात् ३६० नाक्षत्र दिन बाद वह तारा सूर्य से २४ मिनट कम २४ घंटे पहले और ३६६ नाक्षत्र दिन बाद पूरे २४ घंटे अर्थात् १ दिन पहले उदय होगा जब कि सूर्य और वह तारा फिर साथ हो जावेंगे । इसलिए जितने समय में नक्षत्र ३६६ भगण करता है उतने समय में सूर्य १ बार कम उदय होता है और एक भगण पूरा करता है। इसलिए सूर्य एक भगण काल में (१ सौर वर्ष में ) ३६६-१ बार उदय होता है। इसी प्रकार अन्य ग्रहों के उदय के बारे में समझना चाहिये । भवन्ति शशिनो मासाः सूर्येन्दुभगणान्तरम् । रविमासोनितास्ते तु शेषाः स्युरधिमासकाः ॥३५॥ अनुवाद - सूर्य और चन्द्रमा के महायुगीय भगणों का जो अंतर होता है

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