सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 52, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंमध्यमाधिकार २६ उतने ही चान्द्र मास एक महायुग में होते हैं। एक महायुग में जितने सौर मास होते हैं उनकी संख्या को महायुगीय चान्द्र मासों की संख्या से घटा देने पर शेष अधिमासों की संख्या होती है ॥३५॥ विज्ञान भाष्य—जिस समय सूर्य और चन्द्रमा की युति होती है उस समय को अमावस्या कहते हैं। इस समय चन्द्रमा और सूर्य बहुत पास होते हैं। एक अमा- वस्या से दूसरी अमावस्या तक के समय को चान्द्र-मास कहते हैं। इसलिए यदि यह जानना हो कि एक महायुग में कितने चान्द्र मास होते हैं तो पहले यह जानना चाहिये कि एक महायुग में सूर्य और चन्द्रमा की युति कितने बार होती है। इसके लिए सूर्य और चन्द्रमा के महायुगीय भगणों का अंतर निकाल लेना पर्याप्त है। क्योंकि यह बात सहज ही जानी जा सकती है कि यदि दो लड़के किसी गोल मैदान का चक्कर लगाने लगें और यदि एक लड़का घण्टे में ५ चक्कर लगाता हो और दूसरा ३ तो दोनों यदि एक ही स्थान से एक ही समय दौड़ना आरंभ करें तो घण्टे . भर में दोनों लड़के ५-३ = २ बार एक दूसरे से मिलेंगे। इसके लिए घड़ी की घण्टा और मिनट बतलाने वाली सुइयों की चाल का उदाहरण बहुत उपयुक्त है। बारह बजे दोनों सुइयां एक दूसरे से मिली रहती हैं अर्थात् दोनों की युति रहती है। इसके बाद दोनों चक्कर लगाना आरम्भ करती हैं और १ बज कर ५ ५/११ मिनट पर पहले पहल मिलती हैं। दूसरी बार वे २ बज कर १० १०/११ मिनट पर, तीसरी बार ३ बज कर १६ ४/११ मिनट पर, चौथी बार ४ बज कर २१ ९/११ मिनट पर, पांचवीं बार ५ बज कर २७ ३/११ मिनट पर, छठी बार ६ बज कर ३२ ८/११ मिनट पर, सतवीं बार ७ बज कर ३८ २/११ मिनट घर, आठवीं बार ८ बज कर ४३ ७/११ मिनट पर, ६ वीं बार ९ बज कर ४९ १/११ मिनट पर दसवीं बार १० बज कर ५४ ६/११ मिनट पर और ११ वीं बार ठीक बारह बजे मिलेंगी। इन ग्यारह युतियों के लिए मिनट वाली सुई को १२ चक्कर और घण्टे वाली सुई को १ चक्कर लगाना पड़ा। इसलिए युतियों की संख्या दोनों के चक्करों का अंतर (१२-१) हुई। इसी प्रकार महायुगीय चान्द्र-मासों को संख्या = महायुगीय चन्द्र-भगण—महायुगीय सूर्य-भगण = ५,७७,५३,३३६—४३,२०,००० = ५,३४,३३,३३६ अधिमास—मासों की गणना चान्द्र मास से और वर्षों की गणना सौर वर्ष से होती है। एक सौर वर्ष में १२ सौर मास तथा ३६५·२५८७५ मध्यम सावन दिन होते हैं परन्तु १२ चांद्रमास ३५४·३६७०५ मध्यम सावन दिन का होता है; इसलिए