सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्यग्रहणधिकार ५१५ अथवा मध्य और मोक्षकाल के लंबनों को जोड़ने से जो आवे उसे मध्य स्थित्यर्ध में जोड़ना चाहिए क्योंकि ऐसी दशा में ग्रहण काल बहुत बढ़ जायगा । मान लो कि स्पर्श पूर्व कपाल में और मध्य पच्छिम कपाल में हुआ। यह स्पष्ट है कि ऐसी दशा में ग्रहण का मध्य काल पच्छिम लंबन के कारण कुछ देर में होगा अर्थात् चन्द्रमा हट जाने के कारण सूर्य के सम्मुख कुछ देर में आवेगा । परन्तु स्पर्श के समय चन्द्रमा का लम्बन पूर्व की ओर होगा इसलिये स्पर्श कुछ पहले ही हो जायगा । पहले कारण से ग्रहण का मध्यकाल कुछ पीछे हट जायगा और दूसरे कारण से स्पर्श काल कुछ पहले हो जायगा इसलिये स्पर्श से मध्य काल तक का समय दोनों कारणों से बढ़ जायगा । ऐसी दशा में स्पर्श और मध्यकालिक लंबनों के योग को मध्यम स्थित्यर्ध में जोड़ने से ही स्पर्शकालिक स्पष्ट स्थित्यर्ध ज्ञात होगा परन्तु मोक्षकालिक स्पष्ट स्थित्यर्ध के लिये दोनों लंबनों का अन्तर ही मध्यम स्थित्यर्ध में जोड़ना होगा क्योंकि मध्य काल और मोक्ष काल दोनों पच्छिम कपाल में होंगे केवल स्पर्श ही पूर्व कपाल में होगा । परन्तु यदि स्पर्श और मध्य दोनों पूर्व कपाल में हो और मोक्ष पच्छिम कपाल में हों तो स्पर्शकालिक स्पष्ट स्थित्यर्ध के लिये लंबनों के अंतर को मध्य स्थित्यर्ध में जोड़ना होगा और मोक्षकालिक स्पष्ट स्थित्यर्ध जानने के लिये लंबनों के योग के मध्यम स्थित्यर्ध में जोड़ना होगा । यहाँ तक जो रीति स्पर्श और मोक्ष काल जानने के लिए बतलायी गयी है उसी रीति से सम्मीलन और उन्मीलन कालों को भी जानना चाहिए । उदाहरण - काशी के लिये संवत् १६८२ वि० के माघ कृष्णा अमावस्या के सूर्य ग्रहण की गणना - सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार - पहले इस दिन के सूर्य, चन्द्रमा, चन्द्रोच्च और राहु को स्पष्ट करना चाहिये । इसलिये कलियुग के आरंभ से इस दिन तक का अहर्गण जानना आवश्यक है । कलियुग से १६८१ वि० की श्रावणी पूर्णिमा तक १८३५५४७˙५२३६ दिन होते हैं। संवत् १६८१ की श्रावणी पूर्णिमान्त काल से १६८२ के माघ के अमाव- स्यान्त काल तक १७।। चान्द्र मास होते हैं क्योंकि इस बीच में कोई मलमास नहीं है। एक चांद्रमास २६.५३०५८८ सावन दिनों के समान होता है । इसलिये १६८१ की श्रावणी पूर्णिमान्त तक १८३५५४७.५२३६ दिन १७ चांद्र मास = ५०२.०२ दिन आधा चांद्र मास = १४.७६५३ दिन ∴ कलियुग से १६८२ की माघी अमावस्या तक १८३६०६४.३०८६ ∴ इस दिन की मध्यरात्रि तक का अहर्गण = १८३६०६४