भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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सूर्यग्रहणाधिकार ५२३ मेष १३४५ असु मीन वृष १५२५ " कुम्भ मिथुन १८२१ " मकर कर्क २०४१ " धनु सिंह २०६३ " वृश्चिक कन्या २००५ " तुला अमावास्यान्तकालिक स्पष्ट सूर्य = ९ रा ०° ३२'·८ = २२० ४१' ∵ अमावास्यान्तकालिक सायन सूर्य = ९ रा २३° १३'·८ = ९ रा २३ १४' मकर राशि के भोग्यांश = ६° ४६' = ४०६' काशी में मकर राशि के उदयासु = १८२१ १८०० : ४०६ :: १८२१ : मकर के भोग्यासु मकर के भोग्यासु = (४०६ X १८२१) / १८०० = ४११ सूर्योदय से अमावास्यान्त तक का समय = १४ घड़ी ४५·५ पल = ८८५·५ पल = ५३१३ असु मकर के भोग्यासु = ४११ कुम्भ के उदयासु १५२५ मीन " १३४५ मेष " १३४५ योग ४६२६ इस योग को ५३१३ असुओं से घटाने पर ६८७ असु शेष होते हैं। यही वृष लग्न के गतासु हैं परन्तु वृष के उदयासु १५२५ हैं। १५२५ : ६८७ :: १८०० : वृष के गतांश ∴ सायन वृष लग्न के गतांश = (६८७ X १८००) / १५२५ = ८११ कला = १३° ३१' ∴ सायन उदय लग्न ३०° + १३° ३१' = ४३° ३१' ∴ अमावास्यान्तकालिक सायन त्रिभोन लग्न = ४३° ३१' - ६०° = ३६०° + ४३° ३१' - ६० = ३१३° ३१'