सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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सूर्यग्रहणाधिकार ५२७ ज्या पूका = ज्या २३° २७' × ज्या २६२°५६' / कोज्या २५°२०' परन्तु ज्या २६२°५६' = - ज्या (३६०° - २६२°५६') = - ज्या ६७°१' ऋणात्मक चिन्ह यह प्रकट करता है कि उदयकालिक अग्रा पू का पूर्व बिन्दु से दक्षिण है । इसलिए ज्या पू का = ज्या २३°२७' × ज्या ६७°१' / कोज्या २५°२०' लरिज्ज्या पूका = लरिज्ज्या २३°२७' + लरिज्ज्या ६७°१' - लरिकोज्या २५°२०' = ६.५६६६ + ६.६६४१ - ६.६५६१ = ६.६०७६ ∴ पूका = २३°५५' इसी की ज्या सूर्योदय काल की उदय ज्या या अग्रा ज्या भी कहलाती है । इसी की सहायता से सूर्योदय का विषुवकाल जानना चाहिये । सूर्योदय का विषुवकाल—यदि गोलीय त्रिभुजक कोणों आ, इ, उ, अक्षरों से और इनके सामने के भुजों को क्रमशः अ, ई, ऊ, अक्षरों से प्रकट किया जाय तो गोलीय त्रिकोणमिति से प्रकट है कि स्परे ऊ/२ = [ज्या ½ (अ + इ) / ज्या ½ (अ - इ)] × स्परे (आ - ई) सूर्य का सायन भोगांश २६२°५६' अथवा १८०° + ११२°५६ है जिसका यह अर्थ है कि शरद संपात बिन्दु से सूर्य ११२°५६ पूर्व है । विषुव संपात के उदय काल से शरद सम्पात के उदय काल तक ३० घड़ी होती है । इसलिए शरद संपात का विषुवकाल ३० घड़ी या १८०° होता है । इसलिये यदि यह मालूम हो जाय कि शरद सम्पात से ११२°५६' का उदय काशी में कितनी देर में होता है तो इस बिन्दु का भी विषुवकाल जाना जा सकता है । ऐसी दशा में चित्र ६२ के गोलीय त्रिभुज श का पू का भुज श का ११२°५६', पू का २३°५५' ∠ श पू का = काशी का लम्बांश = ६०° - २५°२०' = ६०°४०', श पू = श का का विषुवकाल इसलिये गोलीय त्रिकोणमिति के ऊपर दिये हुए सूत्र के अनुसार,
- देखो Todhunter और Leathem की Spherical Trigonometry पृष्ठ ७५