सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२८ सूर्य-सिद्धान्त $स्परे\frac{श पू}{२} = \frac{ज्या \frac{१}{२} (\angle श पू का + \angle पू श का}{ज्या \frac{१}{२} (\angle श पू का - \angle पू श का} \times$ $\hspace{16em}स्परे \frac{१}{२} (श का—पू का)$ $=\frac{ज्या \frac{१}{२}(६४^\circ४०'+२३^\circ२७')}{ज्या \frac{१}{२}(६०^\circ४०'-२३^\circ२७')}\times$ $\hspace{14em}स्परे \frac{१}{२} (११२^\circ ५६'-२३^\circ५५')$ $=\frac{ज्या ४४^\circ३'.५}{ज्या २०^\circ३६'.५} स्परे४४^\circ३२'$ $\therefore लरिस्परे\frac{श पू}{२}=लरिज्या ४४^\circ३'.५-लरिज्या २०^\circ३६'.५+$ $\hspace{20em}लरि स्परे ४४^\circ३२'$ $=६.८४२३-६.५४६५+६.६६२६$ $=१०.२८८७$ $\therefore\frac{श पू}{२}=६२^\circ४७'$ $\thereforeश पू=१२५^\circ३४'$ $=२० घड़ी ५५\cdot७ पल$ अमावास्यान्त का विषुवकाल:--जिस क्षण शरद-सम्पात बिंदु पूर्व क्षितिज पर आवेगा उससे २० घड़ी ५५.७ पल उपरान्त सूर्य क्षितिज पर आवेगा जब इसका सायन भोगांश शरद-सम्पात से ११२°५६' होगा१ । परन्तु वसंत-सम्पात से शरद- सम्पात का विषुव काल ३० घड़ी होता है इसलिए माघी अमावस्या के सूर्योदय के समय विषुवकाल ५० घड़ी ५५.७ पल है। यह नाक्षत्र मान में है। परन्तु सूर्योदय से अमावास्यान्त काल का समय १४ घड़ी ४५ पल है। यह सावन मान में है जो नाक्षत्र मान के १४ घड़ी ४७.५ पल के लगभग है। (देखो पृष्ठ ३२६)। इसलिए, सूर्योदय के समय विषुवकाल = ५० घड़ी ५५.७ पल सूर्योदय से अमावास्यान्त का नाक्षत्र काल = १४ " ४७.५ पल $\therefore$ अमावास्यान्त के समय विषुव काल = ६५ घड़ी ४३.२ पल = ५ घड़ी ४३.२ पल = ३४°१६' १. यह बात उस रीति से भी जानी जा सकती है जो पृष्ठ ३१४-१५ में बतलायी गयी हैं।