भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 554

सूर्यग्रहणाधिकार ५२६ विषुवकाल से उदयलग्न और अग्रा जानना—अब यह जानना है कि जब विषुवकाल ३४°१६' है तब उदयलग्न का सायन भोगांश क्या है ? यह चित्र ६० की सहायता से सहज ही जाना जा सकता है जहाँ व पू = ३४°१६, ∠ का व पू = परमक्रान्ति = २३°२७' और ∠ व पू का = १८०° — ∠ व पू द = १८०° — लम्बांश = १८०° — ६४°४०' = ११५°२०'

यदि गोलीय त्रिभुज के तीन कोण अ, इ, उ अक्षरों से और इनके सामने के भुज क्रमशः आ, ई, ऊ अक्षरों से प्रकट किये जाँय तो गोलीय त्रिकोणमिति के दो सूत्र१ इस प्रकार प्रकट किये जा सकते हैं :— स्परे १/२ (आ + ई) = [कोज्या १/२ (आ - इ) / कोज्या १/२ (आ + इ)] × स्परे ऊ/२ स्परे १/२ (आ - ई) = [ज्या १/२ (अ - इ) / ज्या १/२ (अ + इ)] × स्परे ऊ/२

इन दोनों सूत्रों के सहारे से आ और ई दोनों के मान जाने जा सकते हैं। इस प्रकार चित्र ६० के गोलीय त्रिभुज व पू का से स्परे १/२ (व का + का पू) = [कोज्या १/२ (∠ व पू का - ∠ का व पू) / कोज्या १/२ (∠ व पू का + ∠ का व पू)] × स्परे (व पू)/२ = [कोज्या १/२ (११५°२०' - २३°२७') / कोज्या १/२ (११५°२०' + २३°२७')] × स्परे (३४°१६')/२ = [कोज्या ४५°५६'·५ / कोज्या ६९°२३'·५] × स्परे १७°८'·५

∵ लरिस्परे १/२ (व का + का पू) = लरि कोज्या ४५°५६'·५ + लरि स्परे १७°८'·५ — लरि कोज्या ६९°२३'·५ = ६·८४२२ + ६·४८८६ — ६·५४६४ = ६.७८५४ ∴ (व का + का पू) / २ = ३१°२३'

१. देखो Todhunter और Leathem की Spherical Trigonometry पृष्ठ ७४