सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिलेखाधिकार ५५१ खींची जाने वाली रेखा भी ग्राह्य बिम्ब को काटती है (देखो पृष्ठ ४६७ चित्र १००) । इस चित्र में च को ग्राह्य बिम्ब का केन्द्र समझ लिया जाय तो च से क्रान्तिवृत्त छ प के समानान्तर जो रेखा खींची जायगी वह केन्द्र से वलनाग्र बिन्दु तक जानेवाली रेखा कही जा सकती है। भूछाया छ से इस रेखा का जो अंतर होता है वह च के शर के समान होता है। च को केन्द्र मानकर च छ के व्यासार्ध से जो वृत्त खींचा जायगा वही समासवृत्त होगा। च से जानेवाली वलनाग्र रेखा समास वृत्त को जहाँ काटेगी वहाँ से च छ का अंतर भी चन्द्रमा के शर के समान होगा। इस प्रकार सातवें श्लोक में बतलाये गये नियम की उपपत्ति सिद्ध हुई । छठें श्लोक में यह नहीं बतलाया गया है कि वलनाग्र रेखा की किस दिशा में विक्षेपाग्र रेखा खींचनी चाहिए। यह ८वें श्लोक में बतलाया गया है। सूर्य-ग्रहण में विक्षेपाग्र रेखा उसी दिशा में खींचनी चाहिए जिस दिशा में चन्द्रमा का शर हो अर्थात् यदि चन्द्र शर की दिशा उत्तर हो तो विक्षेपाग्र रेखा भी वलनाग्र रेखा से उत्तर होनी चाहिए, और यदि चन्द्र शर दक्खिन हो तो विक्षेपाग्र रेखा वलनाग्र रेखा से दक्खिन खींचनी चाहिए। इसका कारण चित्र १०० पृष्ठ ४६७ से स्पष्ट है। यदि इस चित्र में छ को सूर्य बिम्ब का केन्द्र १ मान लिया जाय और क्रान्तिवृत्त छ प को चन्द्र की कक्षा च प से उत्तर में मान लिया जाय तो चन्द्र शर दक्खिन होता है। ऐसी दशा में चन्द्रमा सूर्यबिम्ब को ऐसे बिन्दु पर स्पर्श करता है जो सूर्य बिम्ब के दक्षिणार्ध में है। अर्थात् जब चन्द्रशर दक्खिन होता है तब चन्द्रमा सूर्य- बिम्ब को दक्षिण की ओर स्पर्श करता है। इसी प्रकार यह सिद्ध हो सकता है कि यदि चन्द्रमा का शर उत्तर हो तो यह सूर्यबिम्ब को उत्तर की ओर स्पर्श करेगा । परन्तु चन्द्रग्रहण में इसके विपरीत होता है। यह भी इसी चित्र से स्पष्ट होता है, यदि छ को भूछाया का केन्द्र मान लिया जाय । चित्र में चन्द्रशर दक्खिन दिखलाया गया है। ऐसी दशा में भूछाया चन्द्रबिम्ब को ऐसे बिन्दु पर स्पर्श करती है जो चन्द्र बिम्ब के उत्तर की ओर है। इसी प्रकार यदि चन्द्रशर उत्तर हो तो सिद्ध हो सकता है कि भूछाया चन्द्रबिम्ब को दक्षिण की ओर स्पर्श करेगी । इसलिये यह नियम हो गया कि चन्द्रग्रहण में स्पर्शबिन्दु की दिशा चन्द्र शर की दिशा के विपरीत होनी चाहिये अर्थात चंद्रग्रहण में विक्षेपाग्र रेखा वलनाग्र रेखा से उस दिशा में खींचनी चाहिये जो चन्द्रशर की दिशा के विपरीत हो। १. यदि छ को सूर्य बिम्ब का केन्द्र तथा इसके वृत्त को सूर्य बिम्ब मान लिया जाय तो इसी चित्र से सूर्यग्रहण के सम्बन्ध की सारी बातें जानी जा सकती हैं।