भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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परिलेखाधिकार ५६१ अब चन्द्रग्रहण का परिलेख खींचने का एक उदाहरण देकर यह बतलाया जायगा कि पाश्चात्य अर्वाचीन ज्योतिषी सूर्य-ग्रहण की गणना कैसे करते हैं और यह कैसे मालूम करते हैं कि भूभाग के किन किन स्थानों में सर्वग्रास ग्रहण देख पड़ता है तथा किन-किन स्थानों में कितना ग्रास देख पड़ता है। इसके उपरान्त संक्षेप में यह भी बतलाया जायगा कि खाल्दिया और यूनान देश वाले ग्रहण की गणना कैसे करते थे । सूर्य-ग्रहण का परिलेख खींचने का उदाहरण विस्तारभय से छोड़ दिया जाता है। उदाहरण—संवत् १९८१ वि० की श्रावणी पूर्णिमा के चंद्रग्रहण का परिलेख खींचना — यह तो प्रकट ही है कि परिलेख खींचने के लिए तात्कालिक स्फुटवलन और चन्द्रमा के शर के ज्ञान की आवश्यकता पड़ती है और छादक ग्रह के केन्द्र का मार्ग खींचने के लिए स्पर्शकाल, मध्यकाल और मोक्षकाल के स्फुटवलनों और चंद्र-शरों के ज्ञान की आवश्यकता होती है। इनमें से स्पर्श और मोक्षकाल के स्फुटवलनों की गणना चन्द्रग्रहणाधिकार पृष्ठ ४९९-५०५ में की गयी है। इसलिए अब ग्रहण के मध्यकाल के स्फुटवलन की गणना भी कर लेनी चाहिये । आक्षवलन की गणना चन्द्रमा का पूर्णिमान्तकालिक शर = ८.७६ अथवा ८.८ कला (पृष्ठ ४९५) पूर्णिमान्तकालिक चंद्र-भोगांश २९८°३४' (पृष्ठ ४९५) अयनांश २२°४०' (पृष्ठ ४९८-४९९) पूर्णिमांतकालिक चन्द्र सायनभोग ३२१°१४' पूर्णिमान्तकालिक चन्द्र मध्यम कान्तिज्या =ज्या २३°२७' ज्या ३२१°१४' =•३९७६ X ज्या ३८°४६' =•३९७६ X •६२६१ =•२४६१ ∴ पूर्णिमान्तकालिक चन्द्र माध्यम क्रान्ति = १४°२५'•३ दक्षिण ,, ,, शर ८'•८ उत्तर ∴ ,, ,, स्पष्ट क्रान्ति = १४°१६'•५ दक्षिण काशी के सूर्योदय से स्पर्शकाल तक का समय = ४५ घड़ी ५४ पल स्थित्यर्ध = ४ '' ४२ '' सूर्योदय से ग्रहण के मध्यकाल का समय = ५० '' ३६ '' सूर्योदय से मध्यरात्रि का समय (पृष्ठ ५००) = ४६ ११ मध्यरात्रि के उपरान्त ग्रहण का मध्यकाल = ४ '' २५ ''

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