भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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परिलेखाधिकार ५७३ यदि अमावस्या के दिन सूर्य पात पर हो तो इस दिन सूर्यग्रहण अवश्य होगा । इससे पहले या पीछे आने वाली पूर्णमासी के दिन सूर्य इस पात से १५°२०' पहले या पीछे होगा इसलिए चन्द्रमा भी पूर्णमासी के दिन दूसरे पात से इतना ही आगे या पीछे होगा । परन्तु चन्द्रग्रहण की महत्तम सीमा १२°३६ है (देखो पृष्ठ १०८) । इसलिए पूर्णमासी के दिन चन्द्रमा पात से महत्तम सीमा से अधिक दूर होने के कारण ग्रस्त नहीं हो सकता । इस प्रकार यह सिद्ध है कि ऐसी अवस्था में एक पात पर एक ही ग्रहण हो सकता है और वह सर्वग्रास सूर्यग्रहण है । इसलिए एक पात पर कम से कम एक सूर्यग्रहण और अधिक से अधिक तीन ग्रहण (दो सूर्यग्रहण तथा एक चन्द्रग्रहण) हो सकते हैं । एक वर्ष में कितने ग्रहण हो सकते हैं—ऊपर बतलाया गया है कि एक पात से दूसरे पात तक जाने में सूर्य को २७३ दिन लगते हैं और ६ चन्द्रमास में १७७ दिन होते हैं इसलिए यदि किसी पात से दो अंश पहले सूर्य हो और चन्द्र- ग्रहण होने के पश्चात् १३ दिन पर अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण एक ही स्थान से नहीं देखा जा सकता । इस पर मेरा मत इस प्रकार है :— १३ दिन के पक्षवाली बात पर आश्चर्य इसलिए हुआ कि उस समय तिथियों का मान वेदाङ्ग ज्योतिष की मध्यम गणना से जाना जाता था जिसके अनुसार एक पक्ष में १४ दिन ४५ घड़ी २६ पल होते हैं। इस दशा में १३ दिन का पक्ष असम्भव समझा जाता था जो आजकल आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि स्पष्ट गणना के अनुसार १३ दिन के पक्ष अनेक बार हुए हैं और होते रहेंगे । उस प्राचीन काल में १३ दिन का पक्ष ग्रहणों के देखने से ही जान पड़ा था। वह इस प्रकार संभव है :— स्पष्ट मान के अनुसार एक पक्ष में कम से कम १३ दिन ५० घड़ी होते हैं । मान लीजिए ११ तारीख के सूर्योदय से १ घड़ी उपरान्त तक पूर्णिमा थी और इस दिन ग्रस्त चन्द्रमा का अस्त हुआ । ऐसी दशा में यह प्रत्यक्ष है कि पक्ष का आरम्भ १२ तारीख को माना जायगा । यदि पक्ष १३ दिन ५७ घड़ी का हो तो अमावस्या का अन्त २४ तारीख को सूर्योदय से ५८ घड़ी पर होगा। यदि सूर्य में ग्रहण भी लगे तो २५ तारीख को ग्रस्त सूर्य उदय होगा और थोड़ी ही देर में ग्रहण का मोक्ष हो जायगा । इससे यह सहज ही प्रकट हो जाता है कि अमावस्या २४ तारीख की रात को ही समाप्त हो जाती है। इस प्रकार १२ तारीख को प्रतिपदा और २४ तारीख को अमावस्या की गणना होगी और १३ दिन का पक्ष देख पड़ेगा । महा- भारत काल में ऐसी ही घटना हुई होगी ।