भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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ग्रहयुत्यधिकार ५८७ य का अहोरात्रवृत्त अयछ घ के ध्रुवप्रोतवृत्त को छ बिन्दु पर काटता है। अ छ घ गोलीय समकोण त्रिभुज है क्योंकि अहोरात्र वृत्त अ य छ ध्रुवप्रोतवृत्त से ६० अंश का कोण बनाता है। अहोरात्रवृत्त विषुवद्वृत्त के समानान्तर होता है तथा विषुवद् वृत्त और पूर्वक्षितिज वृत्त के बीच का कोण लम्बांश के समान होता है इसलिए कोण छ अ घ लम्बांश के समान है। यदि अ छ घ को सरल समकोण त्रिभुज मान लिया जाय तो कोण अ छ घ = ६० अंश और कोण छ अ घ = लम्बांश । इसलिए कोण छ घ अ = अक्षांश क्योंकि अक्षांश + लम्बांश = ६० अंश । इस- लिए सरल त्रिभुज अ छ घ में छ अ ज्या ∠ छ घ अ ज्या अक्षांश पलभा —— = ————— = ————— = ——— (देखो पृष्ठ ५६ और २६३) छ घ ज्या ∠ छ अ घ ज्या लम्बांश १२ यदि छ घ को घ य के समान और छ अ को च ल के समान मान लिया जाय तो च ल छ अ प ल भा —— = —— = ———— घ य छ घ १२ घ य × प ल भा ∴ च ल = ——————— १२ ग्रह का शर × प ल भा = ——————————— १२ परन्तु च ल घ = ग्रह का आक्षदृक्कर्म । इसलिये सिद्ध होता है कि जिस समय ग्रह क्षितिज पर होता है उस समय उसका आक्षदृक्कर्म उसके शर को प ल भा से गुणा करके १२ से भाग देने पर आता है। यही ८वें श्लोक के पूर्वार्ध का तात्पर्य है। इस प्रकार जब यह सिद्ध हो गया कि क्षितिजस्थ ग्रह का आक्षदृक्कर्म क्या होता है और यामोत्तरवृत्त पर उसका मान शून्य होता ही है तब अन्य समय के लिये उसकी गणना त्रैराशिक से इस प्रकार की जाती है कि जब ग्रह के आधे दिन में आक्षदृक्कर्म का मान कम से कम शून्य और अधिक से अधिक क्षितिजस्थ आक्षदृक्कर्म के समान होता है तब इष्ट नतकाल में इसका मान क्या होता है। अर्थात् दिनार्द्ध : इष्टनत काल :: क्षितिजस्थ आक्षदृक्कर्म : इष्ट आक्षदृक्कर्म । यही ८वें श्लोक का अर्थ है । चित्र १०६ और १०७ में ग्रह पूर्वकपाल में दिखलाये गये हैं। यहाँ घ का शर दक्षिण है तो घ का समप्रोतवृत्त कान्तिवृत्त को ज बिन्दु पर काटता है जो य से पूर्व है। इसलिये दक्षिण शर में य के भोगांश में घ का आक्षदृक्कर्म जोड़ने से ज का भोगांश आवेगा। परन्तु जब ग का शर उत्तर है तो ग का समप्रोतवृत्त क्रान्तिवृत्त