भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 614

ग्रहयुत्यधिकार ५८३ ∠ध य क की जगह पर य + ६०° की क्रान्तिज्या जो पृष्ठ ४८० के समीकरण (२) के अनुसार ज्ञात होती है रखना चाहिए । यदि यह क्रान्ति ज्या क्रा के समान मान ली जाय तो छ य = (ध य x क्रा) / त्रिज्या । इस समीकरण में सब परिमाणों को कलाओं में समझना चाहिए । यह बतलाया गया है (देखो स्पष्टाधिकार पृष्ठ १२२) कि परमक्रान्तिज्या का मान १३६७ कला है और परमक्रान्ति २४° के समान मानी गयी है । २४ का ५८ गुना १३६२ होता है जो १३६७ के बहुत निकट है इसलिए यदि यह मान लिया जाय कि २४ का ५८ गुना १३६७ के प्रायः समान है तो कोई हर्ज नहीं । इसलिए जब २४ अंश की ज्या २४ x ५८ कला के समान होती है तब यह समझने में बहुत हानि नहीं है कि किसी अंश की ज्या उसकी ५८ गुनी कला के समान होती है । इसलिए क्रा = क्रान्त्यंश x ५८ त्रिज्या = ६० x ५८ । इस प्रकार उपर्युक्त समीकरण का रूप यह होगा :- छय = (ध य x क्रान्त्यंश x ५८) / (५८ x ६०) = (ध य x क्रान्त्यंश) / ६० कला कला की ६० गुनी विकला होती है इसलिए यदि ऊपर के समीकरण के दाहने पक्ष को ६० से गुणा किया जाय तो उसका मान विकलाओं में बदल जायगा । परन्तु ६० से गुणा करने पर नीचे वाला ६० कट जायगा और समीकरण का रूप यह होगा :- छ य = ध य x क्रान्त्यंश विकला यहां छ य = च य = आयन दृक्कर्म, ध य ग्रह ध का शर या विक्षेप कलाओं में है और क्रान्ति अंशों में है । इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि य के आगे के ६० अंश की क्रान्ति को अंशों में लिख कर इसको विक्षेप की कलाओं से गुणा कर देने पर जो आता है वह विकलाओं में ध ग्रह का आयन दृक्कर्म है जैसा कि श्लोक १० में बतलाया गया है । इस नियम का दूसरा सरल रूप यह भी हो सकता है कि ग्रह के आयन वलन को अंशों में लिखकर इसको ग्रह की विक्षेप कला से गुणा कर देने से जो आता है वह विकलाओं में ग्रह का आयनदृक्कर्म है । अब यह देखना है कि यह आयनदृक्कर्म किस समय धनात्मक और किस समय ऋणात्मक होता है अर्थात् इस आयनदृक्कर्म को ग्रह के भोगांश में किस समय जोड़ना चाहिये और किस समय घटाना चाहिये । स्पष्टाधिकार के पृष्ठ २०० के चित्र ३६ को ध्यानपूर्वक देखने से पता चल सकता है कि जब तक ग्रह उत्तरायण रहता है,