भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार ६४६ उत्तर-पच्छिम — इस दिशा में अभिजित नक्षत्र क्षितिज के पास ही देख पड़ता है । अभिजित के ऊपर हंसमंडल के तारे हैं । इससे और उत्तर क्षितिज के पास अजगर के मुख के कुछ तारे देख पड़ते हैं । आकाश-गंगा — इस समय आकाशगंगा पूर्व क्षितिज के पास से उत्तर- पच्छिम क्षितिज तक फैली है। पूर्व क्षितिज में यह प्रश्वा को उत्तर तट पर और लुब्धक को दक्खिन तट पर छोड़ती हुई आग्रहायण के उत्तर, अग्नि और ब्रह्महृदय के बीच से होती हुई पारसीक मंडल और काश्यप मंडल के मध्य हंसमंडल के पास दो शाखाओं में बँटती हुई और श्रवण को दक्खिन तट पर छोड़ती हुई पच्छिम और उत्तर-पच्छिम क्षितिज में विलीन हो जाती है । फाल्गुन मास का आकाशचित्र सिर पर—मिथुनराशि इस समय ठीक सिर पर है । पुनर्वसु के दोनों तारे प्रायः खस्वस्तिक पर और प्रश्वा कुछ दक्खिन है । उत्तर – लघुसप्तर्षि ध्रुवतारा से पूर्व की ओर फैला हुआ है । ध्रुवतारा से पच्छिम सिफियस के तीन तारे हैं जिनमें से एक क्षितिज से बिल्कुल मिला हुआ है । लघुसप्तर्षि के पूर्व अजगर की लपेट है जिसका मुंह अभी क्षितिज से नीचे है । उत्तर-पूर्व— इस दिशा में सप्तर्षि मंडल के सातों तारे दिखाई पड़ रहे हैं । सप्तर्षि के ऊपर सर्पाकार मंद-मंद तारे हैं । उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशाओं के बीच क्षितिज के पास ही कुछ कुछ लाल रंग का स्वाती तारा है । पूरब—इस दिशा में क्षितिज के पास कन्या राशि के तारे दिखाई पड़ रहे हैं । अभी चित्रा उदय नहीं हुआ है। कन्या राशि के ऊपर सिंहराशि के सब तारे दिखाई पड़ रहे हैं। नीचे वाला अकेला तारा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का है। इसके ऊपर दो तारे पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के हैं। पूर्वाफाल्गुनी के ऊपर मघा नक्षत्र के तारे हंसिया के आकार के देख पड़ते हैं। इस हंसिया के नीचे के दो तारे बहुत चमकीले हैं जिनमें दक्खिनवाला तारा मघा का योगतारा है। यह भी कुछ कुछ लाल रंग का देख पड़ता है। हँसिया के ऊपर बहुत मंद-मंद तारे हैं। उत्तरवाले तारों को पुष्यनक्षत्र और दक्खिन वालोंतारों को आश्लेषा नक्षत्र कहते हैं। यहीं कर्कराशि भी है। पुनर्वसु और मघा के बीच में जितने मंद-मंद तारे हैं सभी कर्कराशि में कहे जा सकते हैं। १४