सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६५० सूर्य-सिद्धान्त पूर्व और पूर्व-दक्षिण दिशाओं के बीच ४, ५ तारे क्षितिज के पास ही देख पड़ते हैं। ये हस्तनक्षत्र के तारे हैं। पूर्व क्षितिज से लेकर सिर के ऊपर तक वरन् कुछ और पच्छिम तक जितने नक्षत्र क्रान्तिवृत्त के पास देख पड़ते हैं उनको वर्षा के नक्षत्र कहते हैं। इसलिए नहीं कि ये वर्षा ऋतु में देख पड़ते हैं वरन् इसलिए कि जब सूर्य इन नक्षत्रों में रहता है तभी यहाँ वर्षा होती है। वर्षा के नक्षत्रों के नाम क्रमानुसार यह है :—आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त और चित्रा। पूर्व-दक्षिण — इस दिशा में कोई प्रसिद्ध तारा इस समय नहीं देख पड़ता। दक्षिण — इस दिशा में क्षितिज के पास कई तेजवान तारों का समूह है जो जहाज के आकार का देख पड़ता है इसीलिए इसको नौका पुंज (Argo Navis) कहते हैं। इस समूह का प्रधान तारा अगस्त याम्योत्तरवृत्त से पच्छिम हो गया है और क्षितिज के पास देख पड़ता है। चमक में इसका स्थान दूसरा है। पहला स्थान लुब्धक को प्राप्त है जो इससे ठीक ऊपर देख पड़ता है। नौका पुंज के ऊपर लुब्धक मंडल है। पच्छिम दक्षिण—इस दिशा में क्षितिज के पास कोई चित्ताकर्षक नक्षत्र नहीं है। कुछ ऊपर शशक और इससे भी ऊपर प्रसिद्ध आग्रहायण मंडल है। आग्रहायण मंडल के ऊपर प्रायः सिर पर मिथुन राशि के तारे हैं। पच्छिम—इस दिशा में कुछ उत्तर को हटकर अश्विनी नक्षत्र क्षितिज के पास ही है। इससे ऊपर २, ३ बहुत मंद तारे हैं जिसे भरणी नक्षत्र कहते हैं। भरणी से कुछ और उत्तर तीन तारे त्रिकोण बनाते हुए देख पड़ते हैं। भरणी के ऊपर कुछ पच्छिम की ओर कृत्तिका नक्षत्र है। कृत्तिका के कुछ ऊपर और पच्छिम रोहिणी नक्षत्र है। कृत्तिका से उत्तर पारसीक मंडल है इन दोनों नक्षत्रों के ऊपर प्रजापति मंडल है जिसका अग्नि तारा कृत्तिका के ऊपर और ब्रह्महृदय पारसीक के ऊपर है। ब्रह्महृदय के ऊपर प्रजापति का तारा है। पारसीक और प्रजापति मंडलों के उत्तर वाले तारे ब्रह्महृदय, प्रजापति आदि उत्तर पच्छिम दिशा में देख पड़ते हैं। त्रिकोण के उत्तर अंतरमदा के कुछ तारे क्षितिज के पास देख पड़ते हैं। उत्तर पच्छिम—इस दिशा में पारसीक और प्रजापति मंडल के उत्तर वाले तारे हैं जिनकी चर्चा अभी हो चुकी है। इस दिशा से कुछ उत्तर और हटकर काश्यप मंडल के तारे क्षितिज के पास हैं।