सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
पृष्ठ 676, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 676
नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार ६५१ आकाश-गंगा—इस समय उत्तर पश्चिम के कोने से दखिन क्षितिज तक फैली हुई है। उत्तर-पश्चिम क्षितिज से आरम्भ कर के इसमें या इसके आसपास कश्यप, पारसीक, प्रजापति, आग्रहायण, लुब्धकं मंडल और नौका पुंज के तारे हैं । इन चार मासों के आकाश चित्रों और इनके वर्णनों से आकाश के सभी सभी प्रधान तारों और तारासमूहों की जानकारी की जा सकती है । इनकी सहायता से रात्रि में जब आकाश निर्मल हो दिशा, देश और काल का ज्ञान सहज ही हो सकता है । इस प्रकार नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार नामक आठवें अध्याय का विज्ञान भाष्य समाप्त हुआ ।